यह एप इंस्टॉल करिए, फिर पूरी दिल्ली आपकी
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क्या आप म्यूजियम घूमने के शौकीन हैं? क्या आपने दिल्ली के गरगोटी म्युजियम के बारे में सुना है जो राजीव गांधी हैंडीक्राफ्ट भवन, कनॉट प्लेस में है। जहां कुछ अमूल्य रत्न जिनका कोई मोल नहीं है, कुछ दुर्लभ मिनरल और डायनोसॉर के अंडों के अवशेष और उल्का पिंड (टूटते तारा) के फ्रेगमेंट रखें हैं।
इस म्यूजियम के बार में ये सारी जानकारी कहीं और से नहीं बल्कि एक मोबाइल ऐप से मिली है। आप सोच रहे होंगे कि गेमिंग ऐप और चैटिंग ऐप तो होते हैं ये कैसा ऐप है जो ऐसे किसी म्यूजियम के बारे मे बता रहा है तो ज्यादा मत सोचिए। ये सारी जानकारियां उसी ऐप से आई हैं जो दिल्ली स्थित सभी म्यूजियम के बारे में ऐसी ही अनोखी जानकारियां देता है।
आपको बता दें कि इस ऐप का निर्माण ही उस परेशानी से दो-चार होने के बाद किया जिसमें शहर में स्थित कई म्यूजियम के बारे में कोई जानकारी ही नहीं मिलती। ये कहना है इस ऐप के निर्माता वैभव चौहान का जो कला और धरोहरों के विशेषज्ञ हैं और इन्होंने ही एंड्रॉड फोन के लिए ऐसा ऐप बनाया है जो शहर में मौजूद म्यूजियम में क्या अलग और क्या खास है इसकी जानकारी देगा।
44 म्यूजियम के बारे में है जानकारी
यह ऐप पिछले महीने लॉन्च किया गया था और अभी इसमें दिल्ली के 44 म्यूजियम के बारे में जानकारी दी गई है। इन्हें कई श्रेणियों बांटा गया है जैसे आर्ट एंड क्राफ्ट, इतिहास, व्यक्ति पर आधारित, विज्ञान और यातायात।
इस ऐप में म्यूजियम के खुलने बंद होने का समय, प्रवेश शुल्क, खास आकर्षण, पार्किंग, अशक्तों लोग कैसे पहुंचे और किस एरिया में है म्यूजियम ये सब विस्तार से दिया गया है। इस ऐप में म्यूजियम मैप भी है जो दिल्ली के सभी म्यूजियम को दिखाता है और जीपीएस ऑन रखने पर स्मार्ट फोन से इन तक पहुंचने का रास्ता भी दिखाता है।
34 वर्षीय चौहान जिन्होंने केमिकल इंजिनीयरिंग की पढ़ाई की है, पिछले सात सालों से कला, संस्कृति और धरोहर के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इस ऐप को बनाने में दो से ढाई महीने का समय और 6 सदस्यों वाली टीम की मेहनत लगी है।
चौहान जो दिल्ली में ही एक कला एवं संस्कृति से जुड़ी जानकारी देने वाली वेबसाइट के लिए काम करते हैं ने बाताया कि, धरोहर और पर्यटन में एक तालमेंल होना बहुत जरूरी है। इसलिए आईआईटी से एक्जिक्यूटिव एमबीए करने के बाद मुझे पर्यटन मार्केटिंग में एक अच्छा भविष्य दिखाई दिया।
ऐप जो एक बार में देगा कई जानकारी
यह ऐप बहुत ही उपयोगी है क्योंकि यह आसपास स्थित यानी एक दूसरे से सटे सभी छोटे-बेड़े म्यूजियम को दर्शाता है। चौहान बताते हैं कि वो इस ऐप का इस्तेमाल बड़े म्यूजियम के जरिए छोटे म्यूजियम तक पहुंचाने में कर रहे हैं। हर बार जब कोई किसी खास म्यूजियम के बारे में पता करेगा उसे उसके आसपास के अन्य म्यूजियम भी दिख जाएंगे।
यह ध्यान देने योग्य है कि इस ऐप में राष्ट्रपति भवन म्यूजियम और बांग्ला साहिब गैलरी के बारे में कोई जानकारी नहीं है क्योंकि ये दोनों उस समय तक तैयार नहीं हुए थे जब ऐप लॉन्च हुआ था। एक बात और आपको इस ऐप पर म्यूजियम की तस्वीर भी नहीं मिलेगी क्योंकि उनके फाइल की साइज भारी होती है जो ऐप के लिए परेशानी बन सकती है।
साल के अंत तक चौहान आर्ट गैलरियों, सांस्कृतिक केंद्रों और कार्यक्रमों को भी इसमें जोड़ेंगे। चौहान आगे कहते हैं कि वो फ्रेंड ऑफ म्यूजियम नाम के कॉन्सेप्ट को प्रचारित करना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने एक प्रतियोगिता करवाने का भी मन बनाया है जिसमें लोग ये ऐप डाउनलोड करके अपनी सेल्फी खींचकर इस ऐप के फेसबुक पेज पर प्रदर्शित करेंगे। हालांकि ये ऐप अभी सिर्फ दिल्ली के लिए है पर चौहान इसे देश के अन्य शहरों तक भी ले जाने का सोच रहे हैं।