ताज होटल की नीलामी की कार्रवाई पर रोक, कोर्ट ने पूछा इतनी जल्दी क्यों है
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टाटा समूह द्वारा संचालित इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (आईएचसीएल) ने प्रतिष्ठित ताज मानसिंह होटल की सार्वजनिक नीलामी की अनुमति संबंधी फैसले को हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी है।
इसके बाद अदालत ने एनडीएमसी को फिलहाल कोई भी कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट के सिंगल जज ने कल ही आईएचसीएल की नीलामी संबंधी रोक लगाने की याचिका भी खारिज कर दी थी।
न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजयोग व न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी की खंडपीठ ने आईएचसीएल द्वारा दायर याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि शाम को आपकी याचिका खारिज हुई और आपने तुरंत अपील दायर कर दी, आखिर इतनी जल्दी क्यों है।
भारत कोई अराजक गणतंत्र नहीं है। एनडीएमसी तुरंत होटल जब्त नहीं कर रही है। अदालत ने याची के अधिवक्ता से पूछा कि आप बताएं क्या चिंता है। सिंगल जज के आदेश को पचाने के लिए कुछ तो समय लेते।
आप होटल चला रहे हैं, क्या एनडीएमसी अधिकारी होटल को जब्त करने के लिए आ रहे हैं। खंडपीठ ने कहा हम आपसे (आईएचसीएल) मजबूत बनाने की उम्मीद करते हैं।
यदि शुक्रवार की बात होती तो समझा जा सकता था कि आपको बिना नोटिस दिए कार्रवाई की गई है। एनडीएमसी के अधिकारी उपस्थित हैं, वे जिम्मेदार व्यक्ति हैं और रातभर में कार्रवाई नहीं कर रहे।
आदेश के दूसरे दिन ही याचिका दायर करने पर सवाल
खंडपीठ ने एनडीएमसी को निर्देश दिया कि वे अगले आदेश तक कोई ठोस कार्रवाई न करें। इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई 15 सितंबर तय कर दी। इससे पहले सिंगल जज ने आईएचसीएल की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें एनडीएमसी को होटल का लाइसेंस नवीनीकरण करने का निर्देश देने का आग्रह किया था।
उक्त कंपनी वर्ष 1978 से यह होटल एनडीएमसी के साथ मिलकर चला रही है। आईएचसीएल का कहना है कि 1978 से वह होटल चला रही है और होटल में लंबित निर्माण पूरा किया और संपत्ति के निर्माण की लागत का पूरा भुगतान किया था।
उसने एनडीएमसी से 33 वर्ष का अनुबंध किया था। होटल का लाइसेंस वर्ष 2011 में खत्म हो गया और तभी से लाइसेंस की अवधि अस्थायी रूप से बढ़ाई जाती रही।केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने वर्ष 2011 को पहली बार एनडीएमसी को होटल की खुली नीलामी करने को कहा था और एनडीएमसी ने बोली का पहला अधिकार आईएचसीएल को प्रदान करने से इंकार कर दिया था।
आईएचसीएल ने अप्रैल 2013 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस निर्णय को चुनौती दी थी लेकिन अदालत ने एनडीएमसी के हक में फैसला सुनाया था।