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पड़तालः संदिग्ध आतंकी देवबंद में लेते हथियार चलाने और विस्फोटक बनाने की ट्रेनिंग

Wed, 18 Nov 2020 04:57 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोतम वर्मा, नई दिल्ली
पुरुषोतम वर्मा, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 18 Nov 2020 04:57 AM IST
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Suspected terrorists to take training in Deoband to make explosives and firing
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala

दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में आए आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के संदिग्ध आतंकी अब्दुल लतीफ मीर व मो. अशरफ खटाना आतंकी ट्रेनिंग के लिए दिल्ली होकर देवबंद (यूपी) जा रहे थे। यहां इनको हथियार चलाने और विस्फोटक बनाने की ट्रेनिंग दी जानी थी। देवबंद में ट्रेनिंग के बाद यूपी होकर नेपाल के रास्ते पाकिस्तान जाने की फिराक में थे। दिल्ली पुलिस दिल्ली व यूपी में छिपे इनके संपर्कों की तलाश कर रही है।

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स्पेशल सेल के एक अधिकारी ने बताया कि दोनों संदिग्धों को पाकिस्तान में बैठे जैश के हैंडलर ने यूपी जाने के लिए कहा था। इनको कहा गया था कि देवबंद में उन्हें उनका आदमी मिलेगा जो आतंक की छोटी ट्रेनिंग दिलवाएगा। इसके बाद बड़ी ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भिजवाएगा। खुफिया विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि ये चिंता की बात है कि यूपी में आतंकी ट्रेनिंग दी जा रही है। ये बात भी देखने में आई कि पहले गिरफ्तार किए गए आतंकियों ने यूपी से ही हथियार लिए थे। 
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स्पेशल सेल के पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूछताछ में ये बात भी सामने आई है कि दोनों संदिग्ध पिछले करीब आठ महीने से जेहादी बने थे। अब किसी भी सूरत में आतंकी बनना चाहते थे। शुरुआती जांच में ये बात सामने आई है कि ये धारा 370 खत्म करने के बहुत खिलाफ हैं और जम्मू कश्मीर की स्वतंत्रता के लिए लड़ना चाहते हैं। इन्होंने सितंबर व अक्तूबर में तीन बार पाकिस्तान जाने की कोशिश की थी, मगर बॉर्डर पर सख्ती होने के कारण नहीं जा पाए थे। 
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पूरी दुनिया में इस्लाम फैलाने की मुहिम से जुड़ना चाहते थे
 गिरफ्तार आतंकियों ने पूछताछ में बताया है कि ये सोशल मीडिया पर मौलाना मसूद अजहर को सुनते थे और जम्मू-कश्मीर की आजादी के लिए और पूरी दुनिया में इस्लाम फैलाने के लिए उनसे जुड़ना चाहते थे। न्यूज चैनलों पर दुनिया भर के मुस्लिमों के साथ क्रूरता की खबरें सुनते थे और अरसद मदनी, मौलाना मुफ्ती फैजुल वाहिद द्वारा देवबंद में दिए गए व्याख्यान और मुफ्ती मुजफ्फर हुसैन व नजीर अहमद साहा काशी को जम्मू कश्मीर में पढ़ते थे। इन सबको सुनते-सुनते जेहादी बनते चले गए। 

चार महीने पहले पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में आया था
अब्दुल लतीफ मीर ने मो. अशरफ खटाना व अन्य जेहादी युवाओं के साथ बॉर्डर से पाकिस्तान जाने की कोशिश की थी। करीब चार महीने पहले फेसबुक मैसेंजर के जरिए लाहौर में बैठे हैंडलर अफताब मलिक के संपर्क में आया। इसके बाद अफताब से व्हाट्सएप कॉल करने लगा। अफताब ने ही उसे फेसबुक प्रोफाइल पर मौलाना मसूद अजहर की फोटो लगाने को कहा था। अफताब ने इनको आपत्तिजनक साहित्य भेजा था। आतंकियों ने बताया कि वह अफताब के जरिए जैश के पाकिस्तान के एक गुुर्गे के संपर्क में आए। उसने बॉर्डर क्रॉस कराने की बात कही थी। उसने ही इनको यूपी जाने को कहा था। यहां कुछ दिन की ट्रेनिंग के बाद पाकिस्तान आने की बात कही थी। इनको हथियार कुपवाड़ा में इनके एक साथी ने ही दिए थे।

ये सामान मिला
दो मोबाइल फोन, आधार कार्ड, कपड़ों का बैग, मो. अशरफ खटाना का मदरसा का आईकार्ड, जेएंडके बैंक का डेबिट कार्ड, अब्दुल लतीफ मीर का वोटर कार्ड, जेएंडके ग्रामीण बैंक का डेबिट कार्ड। इसके अलावा मोबाइल से आपत्तिजनक जेहादी ऑडियो, वीडियो फाइल व साहित्य मिला है।


कोर्ट में मुंशी है अब्दुल लतीफ के पिता 
स्पेशल सेल के पुलिस अधिकारियों के अनुसार अब्दुल लतीफ मीर के पिता सोपोर जिला कोर्ट में मुंशी हैं। पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद मदरसा खेरम्बार, श्रीनगर चला गया था। अशरफ खटाना के पिता भी सरकारी सेवा से रिटायर हैं। वर्ष 2012 में इसने पढ़ाई छोड़ दी और इसके बाद अब्दुल लतीफ के पास चला गया। 

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