दिल्ली के असली बॉस पर संशय बरकरार, 29 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा फैसला
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सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्ली सरकार की उस याचिका की सुनवाई की जिससे यह फैसला होना है कि आखिर दिल्ली का असली बॉस कौन है। दरअसल दिल्ली सरकार ने अपनी इस याचिका में मांग की है कि केंद्र और दिल्ली सरकार के अधिकारों का निपटारा किया जाए और दिल्ली को पूर्ण राज्य जैसे अधिकार मिलें। बता दें कि, यह याचिका दिल्ली सरकार ने अप्रैल में दायर की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के संविधान के आर्टिकल 131 के तहत याचिका दाखिल करने पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आप खुद को कैसे राज्य कह सकते हैं?
हालांकि आज अदालत में इस मामले में कोई फैसला नहीं आ सका। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर अगली सुनवाई 29 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी है।
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाएगी दिल्ली सरकार
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने अदालत में कहा कि वो दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ एक हफ्ते के भीतर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे और दोनों मामलों को एक साथ सुना जाना चाहिए। इस पर सुनवाई कर रही बेंच ने कहा कि यह चीफ जस्टिस तय करेंगे।
वहीं, अदालत में केंद्र सरकार ने याचिका का विरोध किया। अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने अदालत में कहा कि 'मामले में संविधान के आर्टिकल 131 के तहत सूट पर सुनवाई नहीं की जा सकती, क्योंकि दिल्ली राज्य नहीं बल्कि केंद्र शासित प्रदेश है।
आगे उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दे रहे हैं और सूट भी दोनों एक साथ कैसे चल सकते हैं। बता दें कि गुरुवार को इस मामले में हाईकोर्ट, दिल्ली सरकार को बड़ा झटका दे चुकी है।
हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में उपराज्यपाल को दिल्ली का बॉस बताया था। हाईकोर्ट ने कहा था 'एलजी ही दिल्ली के प्रशासक हैं और दिल्ली सरकार उनकी मर्ज़ी के बिना कानून नहीं बना सकती। एलजी, दिल्ली सरकार की सलाह मानने को बाध्य नहीं हैं, केंद्र के नोटिफिकेशन सही हैं और केजरीवाल सरकार के कमेटी बनाने संबंधी फ़ैसले अवैध हैं।'