फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   supreme court to hear delhi govt plea regarding article 239AA, justice khehar aparts him from case

अधिकारों की जंग : जस्टिस खेहर ने खुद को किया केस से अलग, कल होगी सुनवाई

Mon, 04 Jul 2016 02:20 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 04 Jul 2016 02:20 PM IST
विज्ञापन
supreme court to hear delhi govt plea regarding article 239AA, justice khehar aparts him from case
केजरीवाल और पीएम मोदी - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली और केंद्र सरकार के बीच चल रही अधिकारों की जंग को लेकर जो मामला सुप्रीम कोर्ट में दायर किया गया था आज उसकी सुनवाई टल गई है। सुनवाई टलने की वजह इस मामले की सुनवाई कर रहे जस्ट‌िस खेहर का खुद को केस से अलग कर लेना है। इस केस को दूसरी बेंच को सौंपा जाएगा यहीं कारण है ‌क‌ि इस मामले की सुनवाई कल होगी।

विज्ञापन


दरअसल, केजरीवाल सरकार जब से सत्ता में आई है उसका उप-राज्यपाल और केंद्र से कई मुद्दों पर टकराव चलता ही रहा है। इसी के चलते दिल्ली सरकार ने कोर्ट से अपील की थी कि वह दोनों सरकारों के बीच अधिकारों की सीमाओं को तय कर दे।
विज्ञापन


दिल्ली सरकार की दलील थी कि कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां अधिकार स्पष्ट नहीं हैं, जिससे दिल्ली सरकार का कामकाज प्रभावित हो रहा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में चल रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

'प्रभाव‌ित हो रहा है द‌िल्ली का काम'

supreme court to hear delhi govt plea regarding article 239AA, justice khehar aparts him from case
Supreme Court hearing on Saturday - फोटो : Getty Images

दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट में यही मांग की है कि वो हाईकोर्ट के फैसला देने पर रोक लगाए। अदालत में केजरीवाल सरकार की वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि हाईकोर्ट ने इस मामले में आदेश सुरक्षित कर लिया है, लेकिन सरकार चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के फैसला देने पर रोक लगा दे।

‌इंदिरा जयसिंह ने कहा कि दो साल से यह मामला चल रहा है, जिससे दिल्ली का कामकाज बाधित हो रहा है। हाईकोर्ट ने राज्य और केंद्र के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर कई याचिकाओं पर सुनवाई की है।

आम आदमी पार्टी का यह भी कहना है कि दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच का विवाद सुप्रीम कोर्ट को सुनना चाहिए और कोर्ट ही यह फैसला दे कि दिल्ली एक राज्य है या नहीं।

हालांकि चीफ जस्टिस ने कहा है कि अगर हाईकोर्ट अपना फैसला सुनाता है तो सुप्रीम कोर्ट आया जा सकता है,लेकिन सरकार पहले ही हाईकोर्ट के सुरक्षित फैसले पर रोक क्यों चाहती है। इससे पहले दिल्ली हाइकोर्ट ने इस मामले में 24 मई को सुनवाई पूरी कर आदेश सुरक्षित रखा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed