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निर्भया के मौत से पहले दिए 3 बयानों पर ही दोषियों को मिली फांसी की सजा, सुप्रीम कोर्ट ने भी माना

Tue, 10 Jul 2018 09:11 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 10 Jul 2018 09:11 AM IST
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supreme court says Nirbhaya statements Before death became base of all convicts Sentence to death

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को फिर दोहराया कि निर्भया ने मृत्यु पूर्व तीन बयान दिए थे, जिस आधार पर उनके गुनहगारों को मौत की सजा सुनाई गई। निर्भया के ये बयान सच्चे, स्वैच्छिक और दृढ़ हैं। इनमें से एक बयान उन्होंने इशारों से दिया था और ये सभी रिकॉर्ड में दर्ज हैं।

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पहला बयान 16 दिसंबर 2012 की रात अस्पताल में भर्ती होने के बाद डॉक्टर ने दर्ज किया जबकि दूसरा बयान 21 दिसंबर को सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट ने दर्ज किया जिस दिन वह घटनाक्रम का विस्तृत ब्योरा दे रही थी। तीसरा बयान मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने 25 दिसंबर को दर्ज किया जिनमें निर्भया ने काफी कुछ इशारों से ही बयां किया था। 
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पीठ ने कहा कि जहां तक तीसरे मृत्यु-पूर्व बयान की बात है, अदालत पहले ही कह चुकी है कि इस दौरान हस्ताक्षरों, इशारों या हामी भरने वाला बयान  साक्ष्य के तौर पर स्वीकार्य है। अदालत ने एक दोषी विनय के इस दावे को भी ठुकरा दिया कि वारदात के वक्त वह नाबालिग था।
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दोषियों ने मृत्यु-पूर्व बयानों को चुनौती देते हुए दावा किया था कि इन बयानों में विरोधाभास है। दूसरे बयान पर दोषियों के वकीलों का कहना था कि पुलिस डायरी में इसका जिक्र नहीं किया गया है।

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सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से न्याय पालिका में लोगों का विश्वास बढ़ा : पीड़िता की मां

supreme court says Nirbhaya statements Before death became base of all convicts Sentence to death

सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर पीड़िता की मां व पिता ने खुशी जताते कहा कि इस निर्णय से आम लोगों का न्यायपालिका के प्रति विश्वास बढ़ा है और हमें पूरी उम्मीद थी कि फैसला उनके हक में ही आएगा। वहीं दोषियों के अधिवक्ता ने इसे आम लोगों के दबाव में दिया फैसला करार दिया, उन्होंने कहा वे इंसाफ के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। 

फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए निर्भया की मां ने कहा देर से ही सही, एक बच्ची को इंसाफ मिला। मैं चाहती हूं कि इसी तरह देश की सभी पीड़िताओं को इंसाफ मिलना चाहिए। दोषी नाबालिग नहीं थे। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्होंने ऐसा अपराध किया। यह फैसला अदालत में हमारे विश्वास को बढ़ाता है कि हमें आगे भी न्याय जरूर मिलेगा। उन्होंने कहा बिना कारण दोषी मामले को लटकाने में लगे हैं, उनकी बेटी को भी जीने का अधिकार था।

जिस प्रकार इस मामले  में पूरे देश ने इंसाफ के लिए आवाज उठाई यह सभी की जीत है। वहीं  निर्भया के पिता ने कहा, मैं शीर्ष अदालत के फैसले से खुश हूं। हमें विश्वास था कि पुनर्विचार याचिका खारिज होगी।

अब इन अपराधियों को जल्द से जल्द फांसी पर लटकाया जाना चाहिए, फांसी मिलने से अपराधियों में डर पैदा होगा। दूसरी तरफ बचाव पक्ष के अधिवक्ता एपी सिंह ने कहा सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मैं असंतुष्ट हूं। उनके मुवक्किल निर्दोष हैं, उनको सजा लोगों के दबाव व राजनीतिक व सामाजिक कारणों से दी गई है।

वे उनको इंसाफ दिलवाने के लिए लड़ाई लड़ते रहेंगे। उन्होंने कहा निचली अदालत से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक लागों के दबाव व आक्रोश को देखकर सजा दी गई है। सजा किसी को दबाव में नहीं बल्कि साक्ष्यों के आधार पर दी जाती है इस मामले में उनके मुवक्किलों के खिलाफ साक्ष्य नहीं हैं। 

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