यादव सिंह का भी होगा डिमोशन: सुप्रीम कोर्ट
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आरक्षण का लाभ लेकर प्रमोशन पाने वाले नोएडा प्राधिकरण के इंजीनियरों के पदावनति (डिमोशन) की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऐसे इंजीनियरों की सूची बनाई जा रही है।
सूत्रों की मानें तो यादव सिंह का भी डिमोशन तय है। यादव सिंह का पद चीफ इंजीनियर (मौजूदा समय में निलंबित) से घटाकर सीनियर प्रोजेक्ट इंजीनियर किया जा सकता है।
यादव सिंह को अगस्त 1997 को सीनियर प्रोजेक्ट इंजीनियर बनाया गया था। इससे पहले 1995 में वे प्रोजेक्ट इंजीनियर थे। अब नए नियम के लागू होने पर 27 नवंबर 1997 से पहले का पद मिलेगा।
उन सभी को लौटना पड़ेगा पुराने पदों पर
सूत्रों के मुताबिक, नोएडा प्राधिकरण में ऐसे कई इंजीनियर हैं, जिन्हें पदोन्नति में आरक्षण का लाभ मिलने से जल्दी-जल्दी प्रमोशन मिला है। इनमें से कई असिस्टेंट इंजीनियर से सीनियर प्रोजेक्ट इंजीनियर तक बन चुके हैं।
उनको फिर से अपने पुराने पद पर लौटना पड़ सकता है। खासकर 27 नवंबर 1997 के बाद प्रमोशन वाले इंजीनियरों व प्राधिकरण कर्मियों को डिमोशन का दर्द झेलना पड़ सकता है। सूत्रों का कहना है, कि करीब 113 इंजीनियर ऐसे हैं, जिनको प्रमोशन में आरक्षण का लाभ मिला है।
दरअसल, प्रदेश सरकार ने 2007 में अधिसूचना जारी कर एससी-एसटी को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ दिया। इसका विरोध हुआ। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।
सीबीआई को फाइलें भेजने का काम जारी
कोर्ट ने 2012 में इसे खत्म करने का आदेश दिया, मगर प्रदेश सरकार ने इस पर ठोस कार्रवाई नहीं की। इस पर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताते हुए पांच सितंबर तक डिमोशन की प्रक्रिया पूरी करने और 15 सितंबर को रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश करने का आदेश दिया है। ऐसा न करने पर मुख्य सचिव को खुद कोर्ट के समक्ष पेश होने की चेतावनी दी गई है।
नोएडा प्राधिकरण की तरफ से सीबीआई को फाइलें भेजने का काम जारी है। शुक्रवार को 2009-10 की फाइलें भेजी गई हैं। इनमें भूमिगत बिजली की लाइनों से जुड़े टेंडर भी शामिल हैं। उस दौरान कई रिहायशी सेक्टरों में बिजली की केबल डालने का काम शुरू किया गया था।