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केजरीवाल और एलजी की जंग के बीच अटकी वकीलों की नियुक्ति
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 04 Nov 2016 10:01 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किए गए एडवोकेट ऑन रिकार्ड और बहस वकील की नियुक्ति उपराज्यपाल ने रद्द कर दी है। आप सरकार ने इन 15 वकीलों की नियुक्ति की मंजूरी पूर्व तारीख से देने के लिए उपराज्यपाल को फाइल भेजी थी।
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बताते हैं कि ये नियुक्ति सेंट्रल एजेंसी की तरफ से की जाती थी लेकिन नई सरकार ने खुद ही वकील नियुक्त कर दिए थे। सूत्र बताते हैं कि आप सरकार की तरफ से साल की शुरुआत में ही 4 एडवोकेट ऑन रिकार्ड व 11 बहस वकील नियुक्त किए गए थे। उपराज्यपाल ने इस नियुक्ति को मंजूरी नहीं दी थी।
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उपराज्यपाल ने केन्द्रीय कानून मंत्रालय और गृह मंत्रालय से इस मामले में राय मांगी थी। बताते हैं कि कुछ दिन पहले ही गृह मंत्रालय से राय आई थी कि दिल्ली सरकार उच्चतम न्यायालय के लिए इस तरह वकीलों की नियुक्ति नहीं कर सकता।
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नए सिरे से शुरू करें नियुक्ति प्रक्रिया
हमेशा सेंट्रल एजेंसी नियुक्ति करती है जो उच्चतम न्यायालय से जुड़े पैनल में से तय करती है। केन्द्र सरकार से आई राय से राजनिवास ने दिल्ली सरकार को अवगत करा दिया था।
सूत्र बताते हैं कि जब उच्च न्यायालय का आदेश आया कि उपराज्यपाल से मंजूरी अनिवार्य है तो पूर्व तारीख से मंजूरी के लिए आप सरकार ने फाइल भेज दी। अब राजनिवास ने दिल्ली सरकार को यह अवगत कराया है कि इन 15 वकीलों नियुक्ति अवैध है। इन्हें हटाएं। नए सिरे से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करें।
सूत्र बताते हैं कि जब उच्च न्यायालय का आदेश आया कि उपराज्यपाल से मंजूरी अनिवार्य है तो पूर्व तारीख से मंजूरी के लिए आप सरकार ने फाइल भेज दी। अब राजनिवास ने दिल्ली सरकार को यह अवगत कराया है कि इन 15 वकीलों नियुक्ति अवैध है। इन्हें हटाएं। नए सिरे से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करें।