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Delhi NCR News: कृष्ण की लीला में घुले असम के रंग, परिजात हरण ने दिल्ली के दर्शकों को बांधा
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नई दिल्ली। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में रविवार को पारिजात हरण नृत्य-नाटिका का मंचन किया गया। इस प्रस्तुति ने असम की सत्रीया व अंकिया नाट परंपरा को दिल्ली के दर्शकों के सामने जीवंत कर दिया। 400 से अधिक दर्शकों ने इस आयोजन का आनंद लिया।
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श्रीमंत शंकरदेव की अमर रचना पर आधारित इस नृत्य-नाटिका का निर्देशन सुमन्या कश्यप और सुकन्या बरुआ ने किया। प्रस्तुति में रुक्मिणी के प्रेम, सत्यभामा के गर्व और कृष्ण के प्रति समर्पण को संवेदनशीलता से दर्शाया गया। मंच पर नृत्य, संगीत और अभिनय के माध्यम से भक्ति व मानवीय भावनाओं की कई परतें सामने आईं। सत्रीया भारत की आठ प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैलियों में से एक है। इसकी जड़ें पांच सौ वर्ष पुरानी मानी जाती हैं और यह असम के वैष्णव आंदोलन से जुड़ी है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस प्रस्तुति को भारतीय विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
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महोत्सव की आयोजन समिति के अध्यक्ष रजनीश कुमार मिश्रा ने कहा कि यह आयोजन भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत की निरंतरता को सामने लाने का प्रयास है। यह महोत्सव 31 अगस्त तक चलेगा। इसमें सत्रीया के साथ भरतनाट्यम, कथकली, ओडिसी, कथक, छऊ और मणिपुरी जैसी शैलियों को भी मंच दिया जा रहा है।
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