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SC ने गंभीर अपराधों के रिकॉर्ड गुम होने पर यूपी सरकार को लगाई फटकार
ब्यूरो, अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 18 Jul 2017 12:24 AM IST
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हत्या सहित 74 गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़े रिकॉर्ड गायब होने पर सख्त नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। राज्य सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाते हुए शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही इस मामले में सीबीआई को भी पक्षकार बनाया गया है।
न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने रिकॉर्ड गायब होने को बेहद गंभीर बताया। पीठ ने पूछा कि आखिरी बार ये फाइलें किन-किन अधिकारियों के पास थीं। सरकार को एक-एक मामले का रिकॉर्ड बताने को कहा गया है। पीठ ने कहा कि दोषियों को कतई बख्शा नहीं जाएगा। दोषी अधिकारी भले ही किसी भी पद पर क्यों न हाें उन्हें एक झटके में निलंबित कर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि ये रिकॉर्ड इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित अपील के दौरान गायब हुए। रिकॉर्ड गुम होने का खुलासा तब हुआ, जब इनमें से एक मामले में बिना रिकॉर्ड के ही राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी।
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सभी मामले 1981-91 के बीच के हैं
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने पीठ से कहा कि ये सभी मामले 1981 से 1991 के बीच के हैं। उन्होंने कहा कि वह पीठ के समक्ष पूरा रिकॉर्ड पेश करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी। गौरतलब है कि हत्या व कातिलाना हमले समेत 74 आपराधिक मामलों के आरोपी निचली अदालत से बरी हो गए थे। इन फैसलों को राज्य सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अपील लंबित रहने के दौरान ही सारे रिकॉर्ड गुम हो गए।
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न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने रिकॉर्ड गायब होने को बेहद गंभीर बताया। पीठ ने पूछा कि आखिरी बार ये फाइलें किन-किन अधिकारियों के पास थीं। सरकार को एक-एक मामले का रिकॉर्ड बताने को कहा गया है। पीठ ने कहा कि दोषियों को कतई बख्शा नहीं जाएगा। दोषी अधिकारी भले ही किसी भी पद पर क्यों न हाें उन्हें एक झटके में निलंबित कर दिया जाएगा।
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गौरतलब है कि ये रिकॉर्ड इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित अपील के दौरान गायब हुए। रिकॉर्ड गुम होने का खुलासा तब हुआ, जब इनमें से एक मामले में बिना रिकॉर्ड के ही राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी।
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सभी मामले 1981-91 के बीच के हैं
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने पीठ से कहा कि ये सभी मामले 1981 से 1991 के बीच के हैं। उन्होंने कहा कि वह पीठ के समक्ष पूरा रिकॉर्ड पेश करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी। गौरतलब है कि हत्या व कातिलाना हमले समेत 74 आपराधिक मामलों के आरोपी निचली अदालत से बरी हो गए थे। इन फैसलों को राज्य सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अपील लंबित रहने के दौरान ही सारे रिकॉर्ड गुम हो गए।