सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया उत्तरी दिल्ली में हाउसिंग कांप्लेक्स बनाने से रोकने वाला एनजीटी का आदेश
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सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तरी कैंपस के करीब एक हाउसिंग कांप्लेक्स के निर्माण पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने को कहा गया था। दरअसल राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने 8 जनवरी को अपने आदेश में कहा था कि पर्यावरण कानून के ‘एहतियाती सिद्धांत’ को लागू करते हुए हम संबंधित डाटा के मूल्यांकन की आवश्यकता मानते हैं, पुराने डाटाबेस को नहीं।
ये कार्य केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यावरण मंत्रालय और आईआईटी दिल्ली के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक संयुक्त समिति द्वारा किया जाए। लेकिन मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस आर. भानुमति और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि जब दस्तावेजों के साथ इस मामले में काउंटर एफिडेविट ऑन रिकॉर्ड मौजूद था, तो न्यायाधिकरण की तरफ से विस्तृत विमर्श आवश्यक था।
पीठ ने कहा, इसके बाद यदि किसी रिपोर्ट की आवश्यकता थी, तब समिति के गठन का सवाल उठता। एनजीटी के आदेश के खिलाफ यंग बिल्डर्स (प्रा.) लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई कर रही पीठ ने कहा, हालांकि एनजीटी के आदेश में संयुक्त समिति के गठन से पहले ऐसे किसी विमर्श का जिक्र नहीं किया गया है। ऐसे ही कुछ तथ्यों के आधार पर पीठ ने एनजीटी के आदेश को खारिज कर दिया। साथ ही एनजीटी को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता की तरफ से दाखिल काउंटर एफिडेविट और दस्तावेजों का संज्ञान ले और उसके बाद मामले की अहमियत को समझकर कानून के अनुसार आदेश पारित करे।
क्या है मामला
दरअसल दिल्ली विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अपने उत्तरी परिसर के करीब यंग बिल्डर्स को हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाने के लिए पर्यावरणीय मंजूरी देने के खिलाफ एनजीटी से गुहार लगाई थी। सिविल लाइंस में एक व तीन कैवलरी लेन और चार छात्र लेन के बीच बन रहे इस हाउसिंग कांप्लेक्स को लेकर विश्वविद्यालय का कहना था कि यह नजफगढ़, नारायणा, वजीरपुर और आनंद पर्बत सरीखे बेहद प्रदूषित क्षेत्रों के 10 किलोमीटर के दायरे में बन रहा है, जो सीपीसीबी के नियमों के खिलाफ है। साथ ही यह विश्वविद्यालय परिसर और पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट के 100 मीटर के साइलेंस जोन के दायरे में आता है। इसके अलावा भी कई आपत्तियां जताते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय प्रबंधन ने प्रोजेक्ट को रोकने की मांग की एनजीटी से की थी। इसके आधार पर ही एनजीटी ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश जारी करते हुए निर्माण रुकवा दिया था।