तो नहीं गिराए जाएंगे सुपरटेक के टावर!
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सुपरटेक के मुख्य प्रबंध निदेशक आरके अरोड़ा ने कहा कि एमरॉल्ड कोर्ट के एपेक्स और सियाने टावर के निर्माण में किसी नियम की अनदेखी नहीं की गई है। चूक सिर्फ हाईकोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखने में हुई है, जिसके चलते कोर्ट ने यह आदेश पारित किया है।
अब सुपरटेक टावर को गिराने के मसले पर सुप्रीम कोर्ट को दरवाजा खटखटाएगी और वहां अपना पक्ष रखेगी।
अरोड़ा ने कहा कि सुप्रीम में याचिका दायर कर मजबूती से पक्ष रखा जाएगा। अरोड़ा ने शनिवार को सेक्टर 58 स्थित दफ्तर में मीडिया के सामने रूबरू होकर बायर्स से जुड़े सवालों पर जवाब दिए। पेश है प्रेसवार्ता में पूछे गए छह सवाल और उनके जवाब।
'फर्जी नहीं हैं सर्टिफिकेट'
जवाब- कोई भी सर्टिफिकेट फर्जी नहीं लगाया गया है। आईआईटी रुड़की और जामिया मिलिया इस्लामिया का सेफ्टी सर्टिफिकेट लगा है। इसलिए यह आरोप गलत है।
सवालः इन दो टावरों के निर्माण में बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन किया गया है।
जवाब- बिल्डिंग बायलॉज प्राधिकरण बनाता है। उसी के अनुसार नक्शा पास करवाकर निर्माण कराया गया है। बिल्डिंग के किसी भी बायलॉज का उल्लंघन नहीं किया गया है।
'तब अपार्टमेंट एक्ट नहीं था'
सवालः दो टावरों के बीच नौ मीटर की दूरी है, जबकि 16 मीटर की दूरी होनी चाहिए थी।
जवाब- 2009 में जिस समय इसका प्लान मंजूर कराया गया, उस समय अपार्टमेंट एक्ट लागू नहीं था। उस समय के हिसाब से दो टावरों के बीच जितनी दूरी होनी चाहिए थी, उतनी रखी गई है।
सवालः क्या इस प्रोजेक्ट को फायर विभाग की एनओसी और एनवायर्नमेंट क्लीयरेंस नहीं है।
जवाब- यह गलत है। इन दो टावरों के निर्माण के लिए एनवायर्नमेंट क्लीयरेंस और फायर की एनओसी मिली हुई है।
'अथॉरिटी ने कभी काम रोकने को नहीं कहा'
सवालः एमरॉल्ड कोर्ट के निवासियों के लिए पर्याप्त पार्किंग का इंतजाम नहीं किया गया है।
जवाब- कुछ समय पूर्व पार्किंग कम होने की शिकायत मिली थी, जो दूर कर दी गई है। वहां पर्याप्त पार्किंग है।
सवालः प्राधिकरण से काम रोके जाने संबंधी नोटिस जारी होने के बावजूद काम जारी रहा।
जवाब- प्राधिकरण ने काम रोकने संबंधी किसी तरह का आदेश जारी नहीं किया है।