‘सड़कों पर सीखा कामयाबी का सबक’: सुनील भारती मित्तल
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दुनिया की तीसरी और भारत में अव्वल टेलीकॉम इंडस्ट्री एयरटेल के मालिक सुनील भारती मित्तल ने छात्रों को सफलता के मंत्र देते हुए बड़ा ख्वाब देखने को कहा।
शुक्रवार को मानेसर स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे सुनील भारती मित्तल ने कहा कि युवाओं में इतिहास लिखने का माद्दा है।
समारोह में सुनील भारती और पेटीएम के सीईओ विजय शेखर को एमिटी द्वारा मानद डी. लिट की उपाधि दी गई। अपने बारे में मित्तल ने बताया कि जब वे कॉलेज से पढ़ाई कर निकले थे, तब वह भी कुछ बड़ा करना चाहते थे और आज भारत की 95 फीसदी आबादी तक उनकी पहुंच है।
उन्होंने युवाओं से कहा, मैं किसी बिजनेस स्कूल में नहीं गया। बल्कि सड़कों पर सबक सीखे और प्रत्येक अवसर पर उन चीजों को आत्मसात करने और अपनाने की कोशिश की।
जो एक व्यवसाय को स्थापित करने के लिए जरूरी होते हैं। हर चीज की शुरुआत एक छोटे से कदम से होती है, लेकिन लंबी छलांग लगाने के लिए आपको बड़े सपने देखने होंगे।
अपनी बात बताते हुए कहा कि 1970 के दशक में स्नातक करने के बाद 20 हजार रुपये का कर्ज लिया और दोस्तों के साथ मिल कर एक छोटा-सा साइकिल व्यवसाय शुरू किया।
1979 आते-आते महसूस हुआ कि यह ज्यादा बड़ा नहीं हो सकता। 1982 में जापान से आयातित पोर्टेबल जेनरेटरों की बिक्री शुरू की, लेकिन सरकार ने जेनरेटर के आयात पर रोक लगा दी।
टर्निंग प्वाइंट 1992 में आया, जब सरकार पहली बार मोबाइल फोन सेवा के लिए लाइसेंस बांट रही थी। उस अवसर को मैंने लपक लिया। युवाओं को कहा कि सही अवसर पर उसे लपकना जरूरी है।
पेटीएम के सीईओ विजय शेखर ने बताया कि वह हिंदी मीडियम स्कूल से पढ़े। जब इंजीनियरिंग की तो कुछ अलग करना था। पेटीएम की शुरुआत की तो लोगों ने मना किया।
घर वालों ने भी साथ नहीं दिया, लेकिन कुछ अलग सोचने और नया करने का जज्बा जरूरी है। युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि बड़ी सोच के साथ अवसर को तलाशना जरूरी है।
एयरटेल व पेटीएम के चेयरमैन को एमिटी ने दी मानद डॉक्टरेट की उपाधि
मानेसर स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में शनिवार को भारती एंटरप्राइजेज के संस्थापक व चेयरमैन सुनील भारती मित्तल और पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर को मानद डी.लिट की उपाधि दी गई। इसके साथ ही विभिन्न पाठ्यक्रमों के स्नातक व स्नातकोत्तर के 862 छात्रों को डिग्रियां दी गईं।
दीक्षांत समारोह में विशेष कार्य करने वाले को एमिटी यूनिवर्सिटी की ओर से मानद उपाधिक दी गई। इनमें सिलिकॉन वैली कैलीफोर्निया के ब्ल्यू डम कंस्लटिंग के संस्थापक एंव सीईओ प्रो डारियूष रैफिनजड, हैदराबाद के सेंटर ऑफ सेल्यूसलर एंड मॉलेक्यूलर बायोलॉजी के वैज्ञानिक प्रो अमिताभ चटोपाध्याय, चेन्नई के आईआईटी के बायोटेक्नोलॉजी के प्रोफेसर प्रोफेसर राम शंकर वर्मा को प्रोफसरशिप की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
यूएसए के कैंसर इंस्टीटयूट ऑफ एनजे के डिपार्टमेंट ऑफ फार्मोकोलॉजी के रॉर्बट वूड जॉनसन मेडिकल स्कूल के एसोसिएट प्रोफेसर डिबाबराता बनर्जी एवं यूके के यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट्रल लैनकैसायर के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर साइन लैग्वेजेंस के निदेशक डॉ. उलाइक जेशान को अनुपस्थिति में प्रोफेसरशिप की मानद उपाधि प्रदान की गई।