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Delhi NCR News: रंग, रूप और विचारों के संग शुरू हुआ ग्रीष्मकालीन रंगोत्सव
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-अक्स तमाशा के साथ एनएसडी रंगमंडल के ग्रीष्मकालीन नाट्यमहोत्सव 2026 का आगाज
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। रंगमंच की रोशनी, संवादों की गूंज और दर्शकों की तालियों के बीच राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल के वार्षिक ग्रीष्मकालीन नाट्यमहोत्सव 2026 का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। उद्घाटन प्रस्तुति के रूप में मंचित नाटक, अक्स तमाशा ने अभिमंच सभागार में उपस्थित दर्शकों को लोककथा, प्रतीक और समकालीन रंगभाषा के अद्भुत संसार से रूबरू कराया। प्रख्यात रंगनिर्देशक भानू भारती की निर्देशित यह प्रस्तुति ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कन्नड़ साहित्यकार चंद्रशेखर बी. कम्बार के चर्चित नाटक सीरी सिम्पिगे का हिंदी रूपांतरण है। इसका अनुवाद वरिष्ठ रंगकर्मी राम गोपाल बजाज ने किया है।
नाटक में लोककथा शैली, व्यंग्यात्मक प्रतीकों और आधुनिक रंग-संरचना के माध्यम से भ्रम और सत्य के द्वंद्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। मंच सज्जा, प्रकाश, संगीत और कलाकारों के सशक्त अभिनय ने दर्शकों को पूरे समय बांधे रखा। वहीं, उद्घाटन प्रस्तुति को दर्शकों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति और भरपूर सराहना मिली। आगे, 38 दिनों तक चलने वाले इस रंगोत्सव में 10 नाटकों की कुल 26 प्रस्तुतियां मंचित होंगी। महोत्सव में बायेन, ताजमहल का टेंडर, बंदी गली का आखिरी मकान, माई री मैं का से कहूं, तमस, अंधा युग, बाबूजी, आधे अधूरे तथा समुद्र मंथन जैसे चर्चित नाटकों का मंचन किया जाएगा। वहीं, महोत्सव का समापन 14 जून 2026 को समुद्र मंथन के मंचन के साथ होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। रंगमंच की रोशनी, संवादों की गूंज और दर्शकों की तालियों के बीच राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल के वार्षिक ग्रीष्मकालीन नाट्यमहोत्सव 2026 का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। उद्घाटन प्रस्तुति के रूप में मंचित नाटक, अक्स तमाशा ने अभिमंच सभागार में उपस्थित दर्शकों को लोककथा, प्रतीक और समकालीन रंगभाषा के अद्भुत संसार से रूबरू कराया। प्रख्यात रंगनिर्देशक भानू भारती की निर्देशित यह प्रस्तुति ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कन्नड़ साहित्यकार चंद्रशेखर बी. कम्बार के चर्चित नाटक सीरी सिम्पिगे का हिंदी रूपांतरण है। इसका अनुवाद वरिष्ठ रंगकर्मी राम गोपाल बजाज ने किया है।
नाटक में लोककथा शैली, व्यंग्यात्मक प्रतीकों और आधुनिक रंग-संरचना के माध्यम से भ्रम और सत्य के द्वंद्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। मंच सज्जा, प्रकाश, संगीत और कलाकारों के सशक्त अभिनय ने दर्शकों को पूरे समय बांधे रखा। वहीं, उद्घाटन प्रस्तुति को दर्शकों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति और भरपूर सराहना मिली। आगे, 38 दिनों तक चलने वाले इस रंगोत्सव में 10 नाटकों की कुल 26 प्रस्तुतियां मंचित होंगी। महोत्सव में बायेन, ताजमहल का टेंडर, बंदी गली का आखिरी मकान, माई री मैं का से कहूं, तमस, अंधा युग, बाबूजी, आधे अधूरे तथा समुद्र मंथन जैसे चर्चित नाटकों का मंचन किया जाएगा। वहीं, महोत्सव का समापन 14 जून 2026 को समुद्र मंथन के मंचन के साथ होगा।
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