Suicide Prevention Day: बढ़ रहे है आत्महत्या के मामले, महिलाओं से ज्यादा पुरुष होते हैं कमजोर, ऐसे करें पहचान
डॉ. शेखावत ने बताया कि आत्महत्या करने वाले व्यक्तियों के शवों का पोस्टमार्टम करने के दौरान रीढ़ की हड्डी से पानी निकालकर जांच की जाती है। इस पानी में मेटाबोलाइट 5 एचआईएए कम मिला।
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विशेषज्ञ बताते हैं कि महिलाओं में मुकाबले पुरुषों में आत्महत्या के मामले ज्यादा दिखते हैं। पुरुषों में आवेग की स्थिति ज्यादा होती है। जबकि महिलाएं खुद को काफी हद तक संभाल लेती हैं। पुरुष जल्द हार मान लेते हैं और खुद को खत्म करना ही उन्हें एक रास्ता दिखता है।
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के मनोरोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. लोकेश शेखावत ने कहा कि आत्महत्या करने वाले लोगों की मनोस्थिति में तेजी से बदलाव होता है। ऐसे लोगों की पहचान आसान है। हमें अपने आसपास के लोगों पर ध्यान देना चाहिए। यदि किसी को बड़ा नुकसान हुआ है या वह जिंदगी को कुछ नहीं मान रहा तो सतर्क होने की जरूरत है। ऐसे लोग कभी भी अपनी जिंदगी खत्म कर सकते हैं।
किया गया शोध, निष्कर्ष का इंतजार
डॉ. शेखावत ने बताया कि आत्महत्या करने वाले व्यक्तियों के शवों का पोस्टमार्टम करने के दौरान रीढ़ की हड्डी से पानी निकालकर जांच की जाती है। इस पानी में मेटाबोलाइट 5 एचआईएए कम मिला। हालांकि इसका सीधा संबंध मौत से नहीं माना जा सकता। इसे स्पष्ट करने के लिए अभी शोध चल रहा है। बता दें कि हाइड्रॉक्सीइंडोलएसेटिक एसिड (5-एचआईएए) एक मेटाबोलाइट है, जो सेरोटोनिन से बनता है। सेरोटोनिन एक रसायन और न्यूरोट्रांसमीटर है। इसका इस्तेमाल शरीर करता है।
हाई रिस्क पर रहते हैं यह लोग
टनल विजन - कुछ भी समझ न पाना
बड़ा नुकसान - आर्थिक, सामाजिक, मानसिक या अन्य का नुकसान
आवेग वाले व्यक्ति - जो लोग परिणाम के बारे में नहीं सोचते
नशा - ज्यादा नशा करने वाले
अनुवांशिकी - परिवार में किसी ने किया हो
बढ़ रहे है आत्महत्या के मामले
2022 के लिए प्रकाशित भारत में आकस्मिक मृत्यु और आत्महत्या (एडीएसआई) रिपोर्ट में आत्महत्या के मामले 2021 की तुलना में 4.2 फीसदी बढ़े हैं। कुल 170924 लोगों ने आत्महत्या की। यह पिछले 56 सालों में सबसे ज्यादा है। आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर उम्र के समूहों में आत्महत्या की दर में पांच फीसदी की वृद्धि हुई, लेकिन 18 साल से कम उम्र के बच्चों में थोड़ी गिरावट आई है। 18-30 साल के युवा आत्महत्या के 35 फीसदी मामलों में शामिल थे, जबकि 30-45 साल के लोग 32 फीसदी में शामिल थे।