इस लेटर ने खोली पिंकी के दर्दनाक हादसे की सच्चाई
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इस पूरे मामले में पीड़िता के भाई अरूण चौहान ने एक पत्र लिखकर अमर उजाला को भेजा है। जिसमें उसने पिंकी की कहानी अपनी जुबानी बताई है। पेश है उसके अंश...
सेमेस्टर परीक्षा में फेल करने के कारण सेक्टर-14 स्थित महिला महाविद्यालय की छात्राओं ने शनिवार को सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया था। छात्राओं का आरोप है कि एमडीयू ने सेमेस्टर परीक्षा में 356 में से 324 छात्राओं को फेल कर दिया था।
छात्राओं ने मांग की थी कि उत्तरपुस्तिकाओं की दोबारा जांच की जाए। माहौल को देखते हुए पुलिस ने छात्राओं और कॉलेज स्टाफ के साथ शनिवार को मीटिंग कराई थी। जिसमें आश्वासन दिया गया था कि सभी की उत्तरपुस्तिकाओं की पुन: जांच की जाएगी। परंतु ऐसा नहीं किया हुआ।
कुछ भी कहने पर उन्हें डांटा गया और यहां तक कहा गया कि पास होना है तो पैसे दो। सोमवार को जब छात्राएं कोई न होने पर कॉलेज पहुंची तो उन्हें प्रदर्शन करने से रोकने के लिए कॉलेज प्राध्यापकों ने कॉलेज के कमरों में बंद कर दिया।
पिंकी वांट जस्टिस.....
छात्राओं ने पिंकी को फोन कर मदद के लिए बुलाया। पिंकी जब कॉलेज पहुंची तो प्राध्यापकों ने उसके साथ मारपीट की और कहा-तुम लड़कियां कुछ नहीं कर सकती, जल कर मरोगी या कूदकर। जैसी बात कही।
इस पर पिंकी ने कॉलेज के बाहर से पेट्रोल लेकर आई। उसने अपनी चुन्नी पर पेट्रोल छिड़का परंतु पिंकी की धमकी के बावजूद एक महिला प्रोफेसर ने उसे माचिस थमा दी और आग लगाने के उकसाया।
माचिस की तीली जलाते ही पिंकी के कपड़ों ने आग पकड़ ली। कुछ छात्राओं ने आग बूझाने की कोशिश की। घटना के बाद पिंकी को अस्पताल ले जाते वक्त एक महिला प्रोफेसर ने कॉलेज या प्रिंसिपल का नाम लेने पर फेल करने व कॉलेज से निकालने की धमकी दी।
यहां तक की जान से मारने की धमकी दी। अब पिंकी 85 फीसदी जल चुकी है जिंदगी और मौत के बीच अस्पताल में झूल रही है। पुलिस भी सहयोग नहीं कर रहा।
परिजनों के सवाल
--घटना के पांच दिन के बाद भी इस मामले में अबतक किसी की भी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
--पुलिस पर आखिर ऐसा क्या दबाव है कि वह पूर्व प्राचार्या को बचाने में जुटी है? उस पर खुद पीड़िता ने बयान देते हुए आरोप लगाया है?
--कॉलेज में हुए इतने बड़े बवाल के बावजूद उच्चत्तर शिक्षा विभाग दोषी प्रिंसिपल के खिलाफ सख्त कदम क्यों नहीं उठाया? क्या उन पर कोई राजनैतिक दबाव है?
--एंबुलेंस में पिंकी पर दबाव बनाने वाली महिला प्रोफेसर का नाम भी मजिस्ट्रेट को दिए बयान में पिंकी ने दिया। लेकिन, आखिर मजिस्ट्रेट ने उसका नाम क्यों नहीं लिखा?
मजिस्ट्रेट के बयान के बाद से कोई कार्रवाई नहीं हो रही। दो-तीन दिन पुलिसवालों ने भी चक्कर काटे। अब वो भी बंद हो गए। अबतक पुलिस ने किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया। कॉलेज प्रबंधन की तरफ से हमारे खिलाफ अर्नगल अफवाहें फैलाई जा रही है।
सोशल मीडिया पर जस्टिस फॉर पिंकी
पांच दिन पहले शहर के नामी सेक्टर-14 गर्ल्स कॉलेज में छात्रा पिंकी के आत्मदाह के प्रयास के मामले में प्रशासन की भूमिका के बाद सोशल मीडिया पर उसके इंसाफ की आवाज उठनी शुरू हो गई है। जिसमें माध्यम से एक मुहिम चलाकर प्रशासन को जगाने के लिए सोशल आंदोलन छेड़ा जा रहा है।
इस मुहिम में रोजाना काफी संख्या में लोग जुड़ रहे है जो अपने सहयोग के अलावा प्रशासन से भी दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की मांग कर रहे है।
सेक्टर-14 गर्वमेंट गर्ल्स कॉलेज में सोमवार को हुई घटना के बाद उसके परिजन, दोस्त उसे इंसाफ दिलाने के लिए लगातार कोशिश कर रहे है।
सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर जिसमें पिंकी के परिवार के लोगों ने यस वी केन और गर्ल नीड जस्टिस नाम से फेसबुक पर पेज बनाया गया है। जिसमें पीड़िता के समर्थन में अबतक 400 लोग जुड़ चुके है।
फेसबुक पर युवाओं ने दिया समर्थन
फेसबुक के माध्यम से पीड़िता का परिवार लोगों को पिंकी के समर्थन में आवाज उठाने की मांग कर रहा है। पिंकी के लिए बनाए गए यस वी केन पेज पर युवाओं की काफी प्रतिक्रियाएं आ रही है। जिसमें इस घटना को लेकर पूरी तरह कॉलेज प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
उसके भाई अरूण का कहना है कि पिंकी की इस हालत के लिए कॉलेज प्रबंधन पूरी तरह जिम्मेदार है। इसके अलावा व्हाट्स एप पर भी कई ग्रुप बनाकर कॉलेज की छात्राएं पिंकी के आंदोलन को जिंदा रखने की कोशिश कर रही है।
एक छात्रा ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कॉलेज प्रबंधन का सभी छात्राओं पर जबरदस्त दबाव है। मीडिया से बात करने और किसी ऐसे आंदोलन को लेकर अंदर ही अंदर उन्हें दबाया जा रहा है।
हालांकि, छात्राएं पूरी तरह पिंकी के समर्थन में है। उनका कहना है कि पिंकी के दोषियों को जबतक सजा नहीं मिलेगी उनका आंदोलन नहीं रूकेगा। पिंकी के भाई अरूण चौहान ने लोगों से अपील की है कि उनके इस सोशल आंदोलन में ज्यादा से ज्यादा जुड़कर पिंकी को इंसाफ दिलाए।