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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Successful bariatric surgery performed at AIIMS on a 209 kg patient

Delhi NCR News: एम्स में 209 किलो के मरीज की सफल बैरियाट्रिक सर्जरी, 160 किलो हुआ वजन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 06 Aug 2026 08:08 PM IST
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-74 बीएमआई वाले मरीज को डॉक्टरों ने बनाया सर्जरी के लिए तैयार
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32 दिन की प्री-ऑपरेटिव तैयारी से मिली नई जिंदगी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के डॉक्टरों ने 209 किलोग्राम वजन वाले एक मरीज की जटिल बैरियाट्रिक सर्जरी सफलतापूर्वक की है। मरीज को सर्जरी के लिए 32 दिनों तक विशेष तैयारी से गुजारा गया। इस सफल ऑपरेशन के बाद मरीज का वजन घटकर 160 किलोग्राम हो गया है और वह सीपीएपी मशीन से भी मुक्त हो गया।
मरीज का बीएमआई 74 था और वह गले में ट्रेकियोस्टॉमी तथा सांस लेने के लिए हर समय सीपीएपी मशीन पर निर्भर था। डॉक्टरों की बहु-विषयक टीम ने इस असंभव माने जाने वाले ऑपरेशन को संभव कर दिखाया। मरीज जब पहली बार अस्पताल आया तो उसका वजन 181 किलोग्राम था। सर्जरी का फैसला लेने में देरी के कारण उसका वजन तेजी से बढ़कर 209 किलोग्राम हो गया था।
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उसे उच्च रक्तचाप, प्री-डायबिटीज, डिस्लिपिडेमिया, गैस्ट्रो-इसोफेगल रिफ्लक्स रोग, अवसाद और गंभीर ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया जैसी कई स्वास्थ्य समस्याएं थीं। ऑक्सीजन का स्तर सामान्य न होने पर डॉक्टरों को पहले इंट्यूबेशन और फिर आपातकालीन ट्रेकियोस्टॉमी करनी पड़ी।
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विशेष तैयारी और वजन में कमी
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए बैरियाट्रिक सर्जन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, फिजिशियन, पल्मोनोलॉजिस्ट, संक्रमण नियंत्रण विशेषज्ञ, डाइटिशियन, मनोचिकित्सक और फिजियोथेरेपिस्ट की एक संयुक्त टीम बनाई गई। टीम ने मरीज को 32 दिनों तक बेहद कम कैलोरी वाला विशेष आहार दिया। उसे श्वसन व्यायाम, पोषण संबंधी परामर्श और संक्रमण नियंत्रण जैसी तैयारियों से गुजारा गया। इस व्यापक उपचार के बाद मरीज का वजन 209 किलोग्राम से घटकर 172 किलोग्राम हो गया। उसके पेट का घेरा भी 198 सेंटीमीटर से घटकर 178 सेंटीमीटर रह गया।
सर्जरी के बाद तेजी से सुधार
करीब दो घंटे दस मिनट तक चली वन एनास्टोमोसिस गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी हुई। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत तेजी से सुधरने लगी। सर्जरी के केवल 13 दिन बाद वह पूरी तरह बिना सीपीएपी के सामान्य रूप से सांस लेने लगा। अस्पताल से छुट्टी के समय उसका वजन घटकर 160 किलोग्राम रह गया।

सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मंजूनाथ ने इसे मल्टीडिसिप्लिनरी उपचार पद्धति की सफलता का उदाहरण बताया। उनका मानना है कि अत्यधिक मोटापा, ट्रेकियोस्टॉमी या सीपीएपी पर निर्भरता जैसी स्थितियों को सर्जरी में हमेशा बाधा नहीं माना जाना चाहिए। यदि अनुभवी विशेषज्ञों की टीम, वैज्ञानिक योजना और सर्जरी से पहले उचित तैयारी की जाए, तो ऐसे अत्यंत जटिल मरीजों का भी सुरक्षित और सफल इलाज संभव है।
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