बच्चों ने बदली स्कूल की तस्वीर, बनाए तीन शौचालय
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शौचालय नहीं होने की वजह से जिस स्कूल में अभिभावक अपनी बच्चियों को भेजने
एक हफ्ते तक बच्चे खुद मिट्टी और फावड़ा लेकर लगे रहे। नतीजा यह हुआ कि स्कूल में तीन शौचालय बनकर तैयार हो गए। इसके बाद से अब वहीं अभिभावक फिर से अपनी बच्चियों को यहां भेजने के लिए तैयार हो गए हैं।
बादशाहपुर क्षेत्र की गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल इसका बेहतरीन उदाहरण है। जहां देश-विदेश के पांच स्कूलों के 35 छात्रों के दल ने गर्मी की छुट्टियों को अनोखे अंदाज में बिताते हुए इसे सार्थक बना दिया।
अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस के बाद तैयार हुई टीम
गुड़गांव के सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालय की परेशानी का
मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया गया था। इसको लेकर हाल ही में साउथ
एशिया की राउंड स्क्वायर कॉलोबोरेटिव सर्विस प्रोजेक्ट में शामिल होने वाले
गुड़गांव समेत देश-विदेश के पांच स्कूलों के विद्यार्थियों ने इस स्कूल को
अपना लिया।
जिसमें दुबई की मिलेनियम स्कूल, असम की असम वैली स्कूल, मुंबई की धीरूभाई
अंबानी स्कूल, नोएडा की जेनेसिस ग्लोबल स्कूल के साथ गुड़गांव की पाथवेज
वर्ल्ड स्कूल के 35 विद्यार्थियों का ग्रुप इसमें शामिल हुआ था।
एक हफ्ते तक स्कूल में खुद अपनी मेहनत से ईंट और पत्थर उठाकर
शौचालय का निर्माण कर दिया। इतना ही नहीं बच्चों ने यहां रंगाई-पुताई समेत
साफ-सफाई का काम भी किया था।
टीम बनी, फिर परिणाम सामने आया
दल में शामिल रही पाथवेज वर्ल्ड स्कूल
में 11वीं की छात्रा सागरिका ने बताया कि सरकारी स्कूलों में लड़कियों की
परेशानी को देख हमने इनकी मदद करने की सोची।
इसके लिए टीम बनी, फिर परिणाम
सामने आया। छात्र वरुण ने बताया कि जब हमने यह प्रोजेक्ट शुरू किया तो
विश्वास नहीं था कि हम यह पूरा कर पाएंगे। लेकिन पूरी टीम ने जबरदस्त काम
किया।
अंगद सिंह भी काफी उत्साहित नजर आया। उसने बताया कि टीम के सभी
साथियों ने काफी रुचि दिखाई। हमें देख गांव की महिलाएं भी हमारी मदद करने आ
गईं।
76 फीसदी स्कूलों में शौचालय की दिक्कत
पिछले साल जिले में हुए एक सर्वे
में सामने आया कि जिले के सरकारी स्कूलों में छात्रों के ड्रॉपआउट का
प्रमुख कारण शौचालय की सबसे बड़ी परेशानी है।
जिले के शहरी और खासतौर पर
ग्रामीण इलाकों के 76 फीसदी सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राएं इस समस्या
से जूझ रहे हैं।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत कई स्कूलों में शौचालय का
निर्माण किया गया, फिर भी अमूमन यह आंकड़ा कम नहीं दिख रहा है।