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जेएनयू हिंसा : छात्रसंघ का एलान, कुलपति के इस्तीफे के बगैर नहीं खत्म करेंगे आंदोलन

Sat, 11 Jan 2020 04:58 AM IST
अवधेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अवधेश कुमार Updated Sat, 11 Jan 2020 04:58 AM IST
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student Union says The movement will not end without the VC jagdish kumar  resignation
jnu student protest - फोटो : अमर उजाला
जेएनयू विवाद सुलझाने के लिए शुक्रवार को दिनभर मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे संग कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार, रजिस्ट्रार प्रो. प्रमोद कुमार और छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठकों का दौर चलता रहा, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
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मंत्रालय ने छात्रों को बताया कि दिसंबर में हुई बैठक के फैसले के तहत छात्रों को यूटिलिटी व सर्विस चार्ज नहीं देना होगा। प्रशासन ने छात्रों की इस मांग को मान लिया है, इसलिए उस बैठक के प्रस्ताव के तहत आंदोलन समाप्त करके छात्र कक्षाओं में लौट जाएं। हालांकि छात्रसंघ ने बैठक समाप्त होने पर बाहर आकर कहा कि कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार के इस्तीफे के बगैर उनका आंदोलन समाप्त नहीं होगा। 
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे ने शुक्रवार सुबह कुलपति व रजिस्ट्रार से विस्तार से बातचीत की। इसमें मंत्रालय का निर्देश है कि विश्वविद्यालय को सामान्य बनाते हुए आपसी बातचीत से आंदोलन को समाप्त करवाएं। इसके बाद रजिस्ट्रेशन करवाकर कक्षाएं शुरू करवाएं। वहीं, बैठक में  छात्रों को विस्तार से कुलपति व रजिस्ट्रार के साथ हुई बैठक की जानकारी दी गई। लेकिन छात्र कुलपति को हटाने की मांग पर अड़े हुए हैं। 
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छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष का कहना है कि हमलोग कुलपति को तुरंत पद से हटाने की मांग करते है। वे विश्वविद्यालय को चलाने लायक नहीं हैं। हमें ऐसा कुलपति चाहिए, जो कैंपस में सामान्य माहौल बनाए। वहीं, छात्रसंघ महासचिव सतीश चंद्र यादव ने कहा एचआरडी के पूर्व मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने भी बृहस्पतिवार को कहा है कि मौजूदा कुलपति योग्य नहीं है। 

हम भी उसी रिपोर्ट का हवाला देकर कहते हैं कि कुलपति को हटाया जाए। कुलपति ने हॉस्टल फीस बढ़ोतरी वापस लेने के मुद्दे को हिंसा का मुद्दा बना दिया। शिक्षा सचिव ने छात्रसंघ को कुलपति से बैठक में हुई चर्चा की जानकारी दी है।

कन्हैया के बाद अब मुझे फंसाया जा रहा है : आईशी घोष 

जेएनयू में रविवार को हुई हिंसा में आरोपी बनाए जाने पर छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष का कहना है कि कन्हैया के बाद अब मुझे साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। हमारे पास भी सबूत हैं, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई तक नहीं की। केंद्र सरकार के उच्च शिक्षा सचित अमित खरे के साथ विवाद सुलझाने पर शुक्रवार को हुई बैठक के बाद बाहर निकलते ही छात्रसंघ अध्यक्ष को आरोपी बनाए जाने की सूचना मिली। 

मंत्रालय में ही आईशी घोष ने कहा कि हॉस्टल फीस बढ़ोतरी के फैसले को वापस लेने के लिए छात्र बीते 76 दिन से शांतिपूर्वक व लोकतांत्रिक ढंग से विरोध कर रहे थे। दिल्ली पुलिस ने छात्रसंघ के पदाधिकारियों व छात्र संगठनों को जेएनयू हिंसा का आरोपी बना दिया। पुलिस अपना काम ढंग से की होती तो रिपोर्ट अलग बनती। 

कैंपस के अंदर नकाबपोश भीड़ ने मुझ पर हमला किया। हमारे पास भी सबूत हैं कि नकाबपोश भीड़ के गुंडे कौन थे? हमने कुछ गलत नहीं किया, इसलिए डर भी नहीं लगता। हमले की सूचना के बाद भी पुलिस कैंपस में नहीं पहुंची। इसका जवाब अधिकारियों को देना होगा।

दिल्ली पुलिस हमें फ्रेम करने की कोशिश में लगी है: साकेत मून 

छात्रसंघ उपाध्यक्ष साकेत मून का आरोप है कि दिल्ली पुलिस हमें फ्रेम करने की कोशिश कर रही है। हमले वाले दिन दिल्ली पुलिस गेट और कैंपस में खड़े होकर तमाशा देख रही थी। कुलपति ने हिंसा करवाई और हमें फंसाया है। हाईकोर्ट ने दो बार कुलपति को कहा कि वे छात्रों से मिलें, लेकिन दोनों बार अदालत के आदेश की अवमानना की गई। दिल्ली पुलिस को हमारे खिलाफ सीधे गृहमंत्रालय से आदेश दिए जा रहे हैं। 

दिल्ली पुलिस ने विकास पटेल को नहीं पहचाना: बालाजी

छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एन साईं बालाजी का कहना है दिल्ली पुलिस हॉस्टल फीस बढ़ोतरी पर पिछले 76 दिनों से विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों को लाठीचार्ज करने के मामले में पहचान लिया। पुलिस को स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया व स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया का नाम याद है लेकिन एबीवीपी का नहीं। पुलिस को हाथ में डंडा लेकर चलने वाले  विकास पटेल का चेहरा तक पता नहीं है।  पुलिस ने जांच के नाम मजाक किया है। 

विवाद सुलझाने के लिए बैठक की तो पुलिस ने आरोपी बना दिया: यादव 

जेएनयू विवाद सुलझाने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्च शिक्षा सचिव बैठक बातचीत करते हैं। उधर, दिल्ली पुलिस वामपंथी संगठनों के छात्रों को कठघरे में खड़ी कर देती है।  पुलिस ने जिन छात्रों व उनसे जुड़े संगठनों के नाम सार्वजनिक किए हैं, वे आम छात्रों की दिक्कतों के लिए 76 दिन से विरोध दर्ज कर रहे हैं। एबीवीपी का नाम तक नहीं लिया गया।

 
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