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आईपीयू : कॉलेजों की मनमानी पर प्रबंधन सख्त
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 04 Oct 2014 11:59 PM IST
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दाखिले के नाम पर विश्वविद्यालय और छात्रों को गुमराह करने वाले कॉलेजों के खिलाफ आईपी यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने नकेल कसनी शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय ने 10 अक्तूबर तक कॉलेजों से मैनेजमेंट कोटे के तहत दिए गए दाखिलों की डिटेल रिपोर्ट मांगी है।
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खास बात है कि रिपोर्ट के साथ कॉलेजों को छात्रों के सर्टिफिकेट भी भेजने होंगे। सर्टिफिकेट के आधार पर विश्वविद्यालय प्रबंधन फर्जी दाखिलों की जांच करेगा।
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यूनिवर्सिटी को दी जाने वाली रिपोर्ट में कॉलेज प्रबंधन को तारीख भी बतानी होगी कि कब दाखिला दिया गया। रिपोर्ट के साथ-साथ छात्रों के सर्टिफिकेट भी भेजने हैं।
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सर्टिफिकेट जांच में ही अब कॉलेज प्रबंधन की मनमानी का सच सामने आ जाएगा, क्योंकि विश्वविद्यालय प्रबंधन जांच करेगा कि उक्त छात्र ने मैनेजमेंट कोटे में दाखिला लेने से पहले संयुक्त प्रवेश परीक्षा में क्वालीफाई तो नहीं किया था।
बता दें कि काउंसलिंग के दौरान जिन छात्रों को सीट अलॉट नहीं हुई थी, उन्हें 17 अगस्त और 20 सितंबर को विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त कई कॉलेजों ने छात्रों को कन्फर्म सीट अलॉटमेंट के मैसेज भेजे थे। उसके बाद कई छात्रों ने विश्वविद्यालय से संपर्क करते हुए दाखिला लेने या नहीं लेने की जानकारी मांगी थी।
तब विश्वविद्यालय प्रबंधन ने छात्रों को नोटिस जारी कर लिखा था कि ऐसे दाखिला गैर कानूनी होंगे, क्योंकि विश्वविद्यालय प्रबंधन संयुक्त प्रवेश परीक्षा के आधार पर काउंसलिंग में ही सीट अलॉट करता है।
डिटेल रिपोर्ट से सीईटी रैंक व नाम का होगा मिलान
सूत्रों के मुताबिक, विश्वविद्यालय के पास शिकायत पहुंची है कि 50 से अधिक छात्रों ने कॉलेज प्रबंधन के मैसेज के आधार पर दाखिला ले रखा है। कॉलेज प्रबंधन से मैनेजमेंट कोटे की डिटेल रिपोर्ट मिलने के बाद उन नामों को सीईटी रैंक की लिस्ट से मिलान किया जाएगा, जिसमें नाम के साथ जन्मतिथि की भी जांच होगी। अगर मैनेजमेंट सीट की रिपोर्ट में किसी छात्र का नाम व जन्मतिथि एक जैसी पाई जाती है, तो फिर उस दाखिले की विभागीय जांच होगी।
अन्य दाखिलों की भी मांगी जाएंगी रिपोर्ट
कॉलेज प्रबंधन को मैनेजमेंट कोटे के अलावा अन्य सीटों पर कुल दाखिले की भी रिपोर्ट भेजनी होगी। इस दूसरी रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय प्रबंधन काउंसलिंग के दौरान सीईटी रैंक के आधार पर अलॉट सीट और कॉलेज का मिलान करेंगे, क्योंकि अगर लिस्ट के तहत नामों में बदलाव मिलता है तो फिर उसका जवाब कॉलेज प्रबंधन को देना होगा।