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दिल्ली: दो गंभीर मसलों पर सुप्रीम कोर्ट ने की तल्ख टिप्पणियां, कहा- तुगलक ज्यादा बुद्धिमान था

Thu, 12 Jul 2018 08:18 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 12 Jul 2018 08:18 AM IST
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Strict comments by Supreme Court on two serious issues of delhi

देश की राजधानी दिल्ली में भूमिगत जल की गंभीर होती समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र, दिल्ली सरकार और नगर निकायों को कड़ी फटकार लगाई। नीति आयोग की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह कहती है कि दिल्ली में भूजल नहीं है, यहां प्रदूषण है। शायद आप राजधानी स्थानांतरित कर लें, लेकिन भूजल आएगा कहां से। जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि मुहम्मद बिन तुगलक ज्यादा बुद्धिमान था और 400 साल पहले ही उसने दिल्ली से राजधानी स्थानांतरित कर ली थी। 

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पीठ ने अधिकारी मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं और जिम्मेदारियों से भाग रहे हैं। जल संसाधन मंत्रालय के हलफनामे पर नाराजगी जताते हुए कहा कि दिल्ली में जल समस्या पर स्कूल का बच्चा या सड़क चलता व्यक्ति भी निबंध लिख सकता है। दिल्ली में प्रदूषण, जल के अभाव, यमुना नदी के सूखने जैसी गंभीर समस्याएं हैं और अधिकारी इनसे निपटने में नाकाम हैं। पीठ ने कहा कि एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में 2021 तक भूजल बिल्कुल नहीं बचेगा जिसका मतलब यह है कि लोग यहां जिंदा नहीं रह सकते। पीठ ने केंद्र सरकार से दिल्ली के भूजल में कमी को रोकने के लिए तुरंत मध्यवर्ती और दीर्घ अवधि के उपाय करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 8 मई को दिल्ली के कुछ हिस्सों में भूजल के ‘अत्यधिक दोहन’ पर गंभीर चिंता जताई थी। अदालत ने स्थिति को ‘अर्द्ध गंभीर’ बताते हुए प्रशासन को इस संकट को दूर करने को कहा था। 
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मंत्रालय का हलफनामा महज लेख
शीर्ष अदालत ने कहा कि जल संसाधन मंत्रालय की ओर से पेश हलफनामे में कुछ नहीं है। एक जगह सूखा और एक जगह बाढ़ है तो आप यह नहीं कह सकते कि औसतन अच्छी स्थिति है। आप क्या करने का प्रस्ताव दे रहे हैं? कुछ भी नहीं। आप सिर्फ जिम्मेदारियां टाल रहे हैं।
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कौन था तुगलक
मुहम्मद बिन तुगलक 1325 से 1351 तक दिल्ली का सुल्तान था। उसने बाहरी आक्रमण के डर से 1327 में अपनी राजधानी दिल्ली से दौलताबाद (अब महाराष्ट्र में) स्थानांतरित कर ली थी। हालांकि बंगाल समेत पूरे साम्राज्य के कई हिस्सों में विद्रोह और बीमारी के कारण वह 1335 में राजधानी वापस दिल्ली लाने के लिए मजबूर हुआ। 

सॉलिसिटर जनरल से कहा, पुरी से पूछकर आएं कि हमें बुद्धिमानी कहां मिलेगी

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी को उनके उस बयान के लिए जमकर फटकार लगाई, जिसमें उन्होंने सीलिंग पर नजर रखने के लिए शीर्ष अदालत की गठित कमेटी के सदस्यों पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की थी। पुरी ने कहा था कि कमेटी के सदस्य वातानुकूलित कमरों में बैठते हैं और उन्हें वास्तविक हालात की कोई समझ नहीं है। पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल से कहा कि कृपया उनसे (पुरी से) ही पूछकर बताइए कि हमें बुद्धिमानी कहां से मिलेगी। 

 पुरी के इस बयान को लेकर जस्टिस मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता की पीठ ने उनसे सवाल किया कि क्या हमें समझ नहीं है? पीठ ने यह टिप्पणी दिल्ली में अवैध निर्माणों की सीलिंग से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की। दोनों जजों ने अप्रैल में आई मीडिया रिपोर्ट पर नाराजगी जताई, जिसमें पुरी ने राष्ट्रीय राजधानी में चल रही सीलिंग की कार्रवाई में निगरानी कमेटी की भूमिका की आलोचना की थी। पीठ ने स्पष्ट किया कि निगरानी कमेटी शीर्ष न्यायालय के निर्देशों पर काम कर रही है। पीठ ने केंद्र सरकार की तरफ से उपस्थित एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एएनएस नाडकर्णी से सवाल किया, क्या हम नहीं जानते कि कैसे काम होता है? कृपया उनसे पूछकर बताइए कि क्या हमें बाजार से बुद्धिमानी मिल सकती है? वह बताएं तो हम भी कुछ समझदारी हासिल कर लें।

बड़े नाम हैं निगरानी कमेटी में शामिल
बता दें कि शीर्ष न्यायालय की तरफ से 24 मार्च, 2006 को सीलिंग पर निगरानी के लिए गठित की गई कमेटी में अपने क्षेत्र के कई बड़े नाम शामिल हैं। कमेटी में मुख्य चुनाव आयुक्त के पूर्व सलाहकार केजे राव, पर्यावरण प्रदूषण (निरोधक व नियंत्रक) प्राधिकरण के चेयरमैन भूरे लाल और सेवानिवृत्त मेजर जनरल सोम झिंगन जैसे लोग शामिल हैं।

डीडीए वाइस चेयरमैन व एसडीएमसी के डिप्टी कमिश्नर को किया तलब
सीलिंग मामले में शीर्ष न्यायालय ने बुधवार को दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के वाइस चेयरमैन और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) के डिप्टी कमिश्नर को 18 जुलाई को उपस्थित होने के लिए कहा। इन दोनों अधिकारियों से नगर में अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। ये स्पष्टीकरण शीर्ष न्यायालय की निगरानी कमेटी की तरफ से जमा की गई रिपोर्ट के आधार पर मांगा गया है, जिसमें दावा किया गया है कि अधिकारी मास्टर प्लान-2021 में संशोधन नहीं होने के आधार पर अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

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