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मोबाइल गेम के चक्कर में जिंदा जले चार बच्चे

Wed, 12 Nov 2014 03:09 PM IST
Updated Wed, 12 Nov 2014 03:09 PM IST
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 Story of five five death in begampur factory fire in delhi.

सोमवार को दिल्ली के बाहरी इलाके बेगमपुर में एक अवैध पेपर प्लेट फैक्टरी में आग लग गई। आग इतनी भयानक थी कि जब तक रोकी जाती पांच जिंदा इंसानों को निगल चुकी थी।

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जब लाशें निकलीं तो उनमें चार मासूम बच्चे थे जो इस फैक्टरी में काम करने वाले बाल मजदूर हों ऐसा नहीं था। असल में इन बच्चों को एक लालच उस फैक्टरी तक खींच लाई थी।
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इन बच्चों को क्या पता था कि जिस लालच में वह जा रहे हैं वही उन्हें मौत के मुंह में पहुंचा देगी। बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद जो सच्चाई सामने आइ उसने परिवार सहित हर जानने वाले का दिल दहला दिया।
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मोबाइल में गेम खेलने गए थे बच्चे

 Story of five five death in begampur factory fire in delhi.

असल में जिस दिन आग लगी उस दिन फैक्टरी के मालिक का छोटा भाई 26 वर्षीय विपिन वहां मौजूद था। श्रवण, शिवम, नीलेश (11 वर्ष) और पांच वर्षीय निरंजन मोबाइल पर एक गेम खेलने के चक्कर में वहां गए थे।

चौंकाने वाली बात ये है कि ये सभी बच्चे और उनका परिवार फैक्टरी मालिक पिंटू शाह के मेहमान थे। इनमें से कुछ लोग बिहार से कुछ दिनों पहले ही दिल्ली आए थे।

श्रवण, नीलेश और शिवम फैक्टरी मालिक पिंटू शाह के बहन के बच्चे थे जबकि निरंजन खुद पिंटू का ही बेटा था। इन चार बच्चों ने विपिन के मोबाइल में एक गेम देखा था जिसे खेलने के चक्कर में आग लगने वाली रात से पहले भी वह फैक्टरी गए थे।

विपिन फैक्टरी मालिक पिंटू शाह का रिस्तेदार था और वह एक अन्य रिस्तेदार धर्मवीर के साथ रोज रात में फैक्टरी में सोने जाया करता था।

बच्चों ने अंदर से बंद किया था कमरा

 Story of five five death in begampur factory fire in delhi.

रविवार को नूडल और समोसा खाने के बाद बच्चों सहित विपिन रात नौ बजे फैक्टरी पहुंचा। उस वक्त पिंटू वहीं था। रात करीब11:30 बजे काम खतम कर पिंटू घर चला गया। जब फैक्टरी में आग लगी तो ‌विपिन और धर्मवीर बाहर सो रहे थे जबकि चारों बच्चे फैक्टरी के एक कमरे में सो रहे थे।

आग लगते ही विपिन और धर्मवीर की नींद टूट गई और वह बाहर निकलने में सफल रहे। लेकिन तभी विपिन को बच्चों की याद आई और वह कमरे की तरफ भागा।

कोई डिस्टर्ब ने करे इसलिए बच्चों ने कमरा अंदर से बंद कर रखा था। विपिन दरवाजा तोड़ने की कोशिश करने लगा। इससे पहले कि कुछ होता विपिन खुद आग से घिर गया।

सबकुछ बेचकर शुरु की थी फैक्टरी

 Story of five five death in begampur factory fire in delhi.

जब तक धर्मवीर आग लगने की खबर घर तक पहुंचाता और मदद के लिए लोगा आते फैक्टरी की आग पांच लोगों की जिंदगी निगल चुकी थी।

असल में विपिन और पिंटू लगभग 15 साल पहले बिहार से दिल्ली आए थे। कई नौकरी करने के बाद उन्होंने बिजनेस करने का फैसला किया।

बिहार के खगड़िया में अपने गांव की जमीन पांच लाख में बेचकर उन्होंने यह फैक्टरी शुरु की थी। अब उनका सबकुछ खतम हो चुका है। आग ने उनसे जिंदगी भर की कमाई के साथ उनका जिगरी दोस्त भी उनसे छीन लिया।

फिलहाल पिंटू के सामने उनकी पत्नि सहित तीन बच्चों का पूरा परिवार है जिनका गुजर-बसर कैसे होगा यह कोई नहीं जानता।

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