दो बार पेट्रोलियम मंत्रालय में होती थी जासूसी
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पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय में जासूसी के मामले में खुलासा हुआ है कि राकेश कुमार व ललिता प्रसाद सप्ताह में दो बार शास्त्री भवन में दाखिल होकर सूचनाएं लीक करते थे। मंत्रालय की नई योजनाओं व अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज के हेडिंग (शीर्षक) की जानकारियां अंदर से ही खरीदारों को बता दिया करते थे। खरीदारों की ओर से दस्तावेज उड़ाने की हरी झंडी मिलने के बाद आरोपी दस्तावेज की फोटो स्टेट ले आते थे। बाद में इसको मोटी रकम पर बेच देते थे। अंदर जाने के लिए नकली आईडी व कार पर लगे स्टीकर्स का इस्तेमाल किया जाता था।
दिल्ली पुलिस सूत्रों के मुताबिक राकेश व ललिता के संबंध शांतनू व प्रयास जैन के अलावा सीधे कॉरपोरेट कंपनियों के अधिकारियों से थे। कुछ लोग दोनों को दस्तावेज चुराने के लिए 40 से 70 हजार रुपये की मोटी सैलरी देते थे। वहीं, ये कॉरपोरेट कंपनियों के अधिकारियों को मोटी रकम पर दस्तावेज बेचते थे। सूत्रों के मुताबिक पुलिस की गिरफ्त में कॉरपोरेट जगत के अधिकारियों ने बताया कि उन लोगों ने एक-एक लाख रुपये चुकाकर राकेश व ललिता से कागजात खरीदे थे। कागजात चुराने के लिए राकेश व ललिता का पिता आशाराम, ईश्वर सिंह अलमारियों की चाबियां उपलब्ध कराते थे। वारदात को अंजाम देते समय राकेश व ललिता प्रसाद सीसीटीवी कैमरों को खराब कर देते थे।
पीएमओ और बजट के चुराए कागजों को बेच नहीं पाए थे आरोपी
शास्त्री भवन से गोपनीय दस्तावेज चुराने वाले आरोपियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय का लेटर, वित्त मंत्री का बजट भाषण व पावर ग्रिड से संबंधित गोपनीय दस्तावेज तो चुरा लिए थे, मगर इन गोपनीय दस्तावेजों को बेच नहीं पाए थे। क्राइम ब्रांच के अधिकारी ने बताया कि आरोपियों ने ये महत्वपूर्ण गोपनीय दस्तावेज उस दिन चुराए थे जिस दिन क्राइम ब्रांच की टीम ने शास्त्री भवन में दबिश दी थी।
ये आरोपी इन गोपनीय दस्तावेजों की एवज में मोटी रकम वसूलना चाहते थे। क्राइम ब्रांच के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि अगर आरोपी बहुत ही महत्वपूर्ण कागजात चुराते थे तो उसकी रकम अलग से लेते थे। दावा है कि आरोपियों की पैठ पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यालय तक थी। ये मंत्रालय के बड़े अधिकारियों के कमरों के अलावा पेट्रोलियम मंत्री के कमरे से भी कागजात चुराते थे।