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प्रदेश सरकार ने एयरपोर्ट के चार और रनवे को मिली हरी झंडी, पीडब्ल्यूसी सौंपेगी रिपोर्ट

Fri, 31 May 2019 11:44 AM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 31 May 2019 11:44 AM IST
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State Government approves four more runways of jewar airport
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
नोएडा एयरपोर्ट के पहले चरण का काम शुरू भी नहीं हुआ है कि प्रदेश सरकार ने चार और रनवे बनाने को मंजूरी दे दी है। इसका सर्वे कर रिपोर्ट बनाने का जिम्मा भी पीडब्ल्यूसी को दिया गया है। नियाल के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि चार और रनवे बनाने को शासन ने हरी झंडी दे दी है। वहां से आदेश भी आ चुका है। 
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इसका सर्वे करने की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूसी को दी गई है। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट के लिए कुल 5000 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है, जिसमें पहला चरण 1334 हेक्टेयर में बन रहा है। बाकी जमीन पर दूसरे चरण में काम होगा। 
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रिपोर्ट आने पर सभी औपचारिकता पूरी कर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने बताया कि दूसरा चरण वर्ष 2039 में पूरा होगा। तब तक पहले फेज के दो रनवे से काम चल जाएगा। 
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2039 में फुल क्षमता पर आने से पहले ही चार और रनवे बन जाएंगे। यह देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा। अब तक 2.5 रनवे के साथ आईजीआई एयरपोर्ट से सेवा मिल रही है। 
 

अधिग्रहण व विस्थापन पर खर्च होंगे 4086 करोड़

नोएडा एयरपोर्ट कुल 1334 हेक्टेयर जमीन पर बनेगा, जिसमें से 1239 हेक्टेयर जमीन किसानों से ली जा रही है और 95 हेक्टेयर ग्राम समाज की जमीन है। 2637 परिवारों को शिफ्ट किया जाएगा। जमीन खरीदने और परिवारों को शिफ्ट करने में 4086 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 

सीईओ डॉ अरुणवीर सिंह ने बताया कि 4086 करोड़ रुपये में से किसानों से जमीन खरीदने पर 2848 करोड़ रुपये खर्च होंगे। विस्थापन पर 894 करोड़ रुपये खर्च होंगे। अतिरिक्त मुआवजे व एसेट्स पर करीब 318 करोड़ और प्रशासनिक व्यय पर करीब 25 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

ओईसीडी के देशों को समान वरीयता
नोएडा एयरपोर्ट देश का पहला एयरपोर्ट होगा, जिसकी बिड में ओईसीडी (आर्थिक सहयोग और विकास संगठन) के सदस्य देशों को भी बराबर की वरीयता दी जाएगी। 

इस संगठन में 36 सदस्य देश हैं, जिनमें ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, यूनान, आइसलैंड, आयरलैंड, इटली, लक्समबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, स्पेन, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। 

इसे बनाने वाली कंपनी को 40 साल तक इस पर अधिकार होगा। हालांकि वीटो पावर नियाल के पास होगा। उसकी अनुमति के बिना कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा।

 दिल्ली एयरपोर्ट से 150 किलोमीटर के दायरे में होने के कारण बिड पैरामीटर में जीएमआर को 10 प्रतिशत अधिक अंक दिए जाएंगे। यानी उसे प्राथमिकता दी जाएगी। बता दें, कि नियाल में नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यीडा और प्रदेश सरकार की भागीदारी है।  

2025 में पूरी क्षमता पर होगा आईजीआई
नियाल के मुताबिक आईजीआई एयरपोर्ट के यात्रियों में हर साल 11 फीसदी की वृद्धि हो रही है। 2030 में 150 मिलियन यात्री सालाना सफर करने लगेंगे, जो कि उसकी कुल क्षमता से कहीं ज्यादा है।

ऐसे में 2023 में नोएडा एयरपोर्ट के बन जाने से बहुत सुविधा हो जाएगी। आईजीआई का 51 फीसदी कार्गो गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर से आता है। यह भी नोएडा एयरपोर्ट की तरफ डायवर्ट हो जाएगा। 
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