मलेरिया से युवक की मौत, सरकार और निगम के आंकड़ों में बड़ा अंतर
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भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका को सोमवार को मलेरिया मुक्त देश होने का प्रमाण-पत्र मिल गया, जबकि भारत में अब भी मलेरिया से मौतें हो रही हैं।
राजधानी दिल्ली में मलेरिया से एक युवक की मौत का मामला सामने आया है। इससे पहले जुलाई माह में भी एक बुजुर्ग की मौत हो गई थी, लेकिन इन बीमारियों से होने वाली मौत का आंकड़ा रखने वाले दिल्ली नगर निगम के अनुसार इस वर्ष व पिछले वर्ष मलेरिया से कोई भी मौत नहीं हुई है।
वहीं दिल्ली सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वर्ष मलेरिया से दिल्ली में 164 लोगों की मौत हुई थी। पूर्वी दिल्ली के मंडावली इलाके में रहने वाले प्रवीण कुमार (31) की मौत इलाज के दौरान मलेरिया से सफदरजंग अस्पताल में हो गई।
गंभीर हालत में भर्ती कराए गए मरीज की हुई मौत
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक का कहना है कि मरीज को गंभीर स्थितियों में दिल्ली के एक निजी अस्पताल से इलाज के लिए शुक्रवार को भर्ती
कराया गया था।
लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका और इलाज के दौरान युवक की रविवार को मौत हो गई। वहीं, पटपड़गंज स्थित मैक्स अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मरीज को 28 अगस्त को तेज बुखार, ठंड, उल्टी और सांस लेने में दिक्कत की शिकायत के बाद अचेतावस्था में भर्ती कराया गया था।
चिकित्सीय जांच में मलेरिया की पुष्टि हुई थी और स्थिति नाजुक होने की वजह से वेंटिलेटर के सहारे रखा गया था। उन्हें बेहतर उपचार दिया जा रहा था लेकिन दो सितंबर को परिजन अपनी मर्जी से मरीज को यहां से लेकर चले गए थे।