33 साल बाद आया है रमजान में ऐसा मौका
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रोजेदारों को इस बार अल्लाह की इबादत में ज्यादा वक्त गुजारने का मौका मिलेगा। 33 साल के बाद रोजेदार साढ़े 15 घंटे से अधिक समय का रोजा रखेंगे।
इस बार पहले रोजे के दिन सहरी सुबह 03 बजकर 49 मिनट पर और इफ्तार शाम 7 बजकर 27 मिनट पर होगा। यानी बंदों का पहला रोजा 15 घंटे 38 मिनट का होगा।
कैलेंडर के मुताबिक, 33 साल बाद रमजान का महीना जून में आया है। इससे पहले 1982 में 23 जून से रमजान का महीना शुरू हुआ था।
इस साल का सबसे अधिक लंबा रोजा
जबकि इस बार 30 जून से शुरू हो रहा है। वहीं, 2015 में आने वाला रोजा इस साल से अधिक लंबा होगा। इस साल पूरे महीने में रोजे की अवधि में ज्यादा कमी नहीं आएगी। दिन बड़े और रातें छोटी होने की वजह से हर रोजा 15 घंटे से ज्यादा समय का होगा।
इस्लामी कैलेंडर व मस्जिदों में जारी शेड्यूल के मुताबिक, सहरी का वक्त तीन बजकर 49 मिनट से शुरू होगा और आखिरी रोजे का वक्त चार बजकर सात मिनट होगा, इसी तरह इफ्तार का वक्त शाम 7:27 बजे से घटकर 7:19 बजे तक हो पाएगा। यानी हर रोजा 15 घंटे से अधिक समय का होगा।
स्थानीय जामा मस्जिद के इमाम जान मोहम्मद ने बाताया कि रोजा फजर (सुबह की नमाज) से पहले शुरू हो जाता है और मगरिब (दिन डूबने के बाद) की नमाज में खत्म होता है। इसी केअनुसार, रोजे का वक्त निकाला जाता है। जून में दिन लंबा होता है।
रमजान का महत्व
गुड़गांव जामा मस्जिद के इमाम कहते हैं कि रोजे की बड़ी फजीलत है। हदीस में है कि रोजेदार की मुंह की बदबू अल्लाह के नजदीक मुश्क की खूशबू से ज्यादा प्यारी है।
रिवायत में है कि कयामत के दिन रोजेदारों के लिए अर्श के तले दस्तरखान चुना जाएगा, रोजेदार उस पर बैठकर खाना खाएंगे और सब लोग अपनी हिसाब में लगे होंगे।
इस महीने में अल्लाह एक नेकी के बदले 70 नेकी देता है। सिर्फ भूखे रहने का नाम रोजा नहीं है, बल्कि पाबंदी के साथ पांच वक्त की नमाज पढ़ना, तौबा करना, बुराइयों से बचे रहने का नाम रोजा है।
रोजे में सेहत का रखें ख्याल
अस्पताल की डायटीशियन डॉक्टर हनी टंडन कहती हैं कि लोगों के मेटाबॉलिक सिस्टम दिन में तीन बार खाने का आदि होता है। ऐसे में इतना लंबा रोजा रखने के बाद एक साथ तला-भूना खाने से परेशानी बढ़ सकती है। गर्मी के मद्देनजर इफ्तार में नारियल पानी बेहतर साबित हो सकता है।
इसके सेवन से सोडियम, पोटेशियम और अन्य इलेक्ट्रोलाइट की कमी पूरी की जा सकती है। वहीं खजूर, शरबत, चना, मांस व फल के सेवन से कैलोरी की कमी पूरी होती है। जिन रोजेदारों को हृदय, मधुमेह और रक्तचाप की शिकायत है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
रमजान के मुबारक महीने में रोजे रखने को लेकर तैयारियां शुरू हो गई है। छुट्टी का फायदा उठाते हुए रविवार को मुसलमानों ने खूब खरीदारी की। मस्जिदों में भी जरूरत की चीजों का बंदोबस्त किया गया।