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बेटे की मौत से टूटे संतोष आनंद फिर उठाएंगे कलम

Mon, 24 Nov 2014 02:11 PM IST
डीपी आर्य/अमर उजाला, गाजियाबाद
डीपी आर्य/अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Mon, 24 Nov 2014 02:11 PM IST
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Son's death broken will again enjoy the satisfaction songwriter pen.

क्रांति, शोर, रोटी, कपड़ा और मकान व प्रेम रोग सरीखी कितनी ही फिल्मों में सुपर हिट गीत देने वाले प्रख्यात गीतकार संतोष आनंद उम्र के आखिरी पड़ाव पर खुद को एकदम अकेला महसूस कर रहे हैं।

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जवान बेटे संकल्प आनंद और बहू नरेश नंदिनी की मौत से मिले दर्द का मरहम वे अपने ही गीतों में तलाश रहे हैं। ...परछाइयां रह जातीं, रह जाती निशानी हैं..जिंदगी और कुछ भी नहीं, तेरी मेरी कहानी है...यह पंक्तियां गुनगुनाते हुए उनकी आंखें आंसुओं से तर हो जाती हैं।
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रविवार को विजयनगर के शिव मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में पहुंचे संतोष आनंद ने ‘अमर उजाला’ से अपना दर्द बयां किया। कलम के इस महारथी ने संकल्प लिया है कि वे फिर से कलम उठाएंगे और युवाओं में देशभक्ति का जज्बा जगाएंगे।
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वे कहते हैं- ‘साढ़े तीन साल की पोती मेरे जीवन को ऊर्जा दे रही है। उसकी खातिर मैं जिंदा हूं। अब फिर से गीत लिखूंगा, लेकिन केवल देशभक्ति के। अब लगातार लिखता रहूंगा।


उन्होंने बताया कि अब जीवन में दो ही लक्ष्य हैं-गीत लिखकर युवाओं में देशभक्ति का जज्बा जगाना और अपनी पोती को रानी लक्ष्मीबाई की तरह बहादुर बनाना।

धीरे-धीरे गुनगुनाते हुए वह बोले, मेरी पोती लक्ष्मीबाई बनकर जीएगी और देश की सेवा करेगी। वो ही जमीन और वो ही आसमान है, पता नहीं, मैं कहां हूं...।

‘अपनों की भीड़ में भी अकेला हूं मैं’

दर्द में डूबे संतोष आनंद से जब बेटे और बहू की मौत पर सवाल किया गया तो मानो उनकी दुखती रग छू गई। काफी देर खामोश रहे। खुद को अंदर ही अंदर संभाला। फिर बोले-मेरा संसार उजड़ गया है।

दुख को व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं। अच्छा हो कि मुझसे कोई इस बारे में बात न करें। न मैं किसी जांच की बात कर रहा हूं और न ही किसी से पूछताछ की।

संसार का कारोबार चल रहा है। घर-रिश्तेदार, भाई भतीजों-मित्रों की भीड़ में भी मैं अकेला हूं। और अपने इसी यथार्थ को जी रहा हूं।

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