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आस्था पर भारी पड़ा प्रदूषण, नहरें भी गंदे नाले में तब्दील, छठ पर्व मनाने को कृत्रिम घाटों को तरजीह
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Mon, 07 Nov 2016 12:17 AM IST
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आगरा कैनाल का सूना पड़ा छठ पूजा घाठ।
इसे प्रशासनिक लापरवाही कहा जाए या फिर जन जागरूकता की कमी। वजह जो भी हो, लेकिन पूरा एनसीआर इसका खामियाजा भुगत रहा है। प्रदूषण की काली छाया ने रविवार को लोगों की आंखों से आंसू निकाल दिए। वातावरण में बनी घातक वायु की मोटी परत ने लोगों हांफने पर मजबूर कर दिया। दिनभर पूरा एनसीआर धुंध की चादर में लिपटा रहा। उधर प्रदूषण के चलते छठ का व्रत करने वालों ने पारंपरिक घाटों से मुंह मोड़ लिया। अधिकतर ने घर पर ही घाट बनाकर पूजा करना बेहतर समझा।
प्रदूषण की मार आस्था पर भी भारी पड़ती दिखाई दी। इस बार हवा ही नहीं बल्कि जहरीले पानी का असर छठ महापर्व पर भी दिखा। गंदे नाले में तब्दील हो चुकी आगरा और गुड़गांव कैनाल से श्रद्धालु दूरी बनाते दिखे। एक अनुमान के मुताबिक एनसीआर में छठ महापर्व मनाने के लिए तकरीबन 20 लाख से ज्यादा लोग जुटते हैं, लेकिन यमुना से लेकर हिंडन, आगरा और गुड़गांव कैनाल तक के घाटों पर प्रदूषण का असर दिखा।
औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में छह लाख से ज्यादा लोग छठ पूजा करते हैं, लेकिन इस बार 60 फीसदी लोगों ने पारंपरिक घाट यानि आगरा और गुड़गांव कैनाल के किनारों से मुंह फेर लिया। पल्ला पुल, ऐतमादपुर, ओल्ड और सेक्टर तीन में नहर के किनारे कृत्रिम घाट बने दिखाई दिए। कुछ ऐसा ही नजारा दिल्ली में कालिंदी कुंज से लेकर फरीदाबाद बॉर्डर तक दिखाई दिया। नहर के किनारे तैयार किए गए घाट सूने-सूने दिखे। इस बार अधिकांश जगह पार्क और छतों पर भी छोटे-छोटे कृत्रिम घाट बना छठ पूजा की परंपरा निभाई जा रही है।
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न यमुना सुरक्षित न नहरें
दिल्ली में वजीराबाद बैराज से ओखला बैराज तक यमुना का स्ट्रैच सबसे प्रदूषित बताया जाता है। ओखला बैराज से कालिंदी कुंज होती हुई यमुना से आगरा कैनाल निकलती है। मौजूदा समय में इसकी दशा और ज्यादा बुरी है। दिल्ली की सरहद में 22 बड़े नाले यमुना को प्रदूषित कर रहे हैं, जबकि इससे आगे फरीदाबाद की सरहद में भी कई नाले प्रदूषण फैला रहे हैं। घरेलू व औद्योगिक स्रोतों से अनुपचारित अपशिष्ट जल के प्रदूषक तत्वों के जरिये गंदगी फैलाते हैं। रोजाना हजारों मिलियन लीटर अपशिष्ठ जल यमुना व आगरा कैनाल में जा रहा है। नालों से बहती गंदगी से उच्च कार्बनिक प्रदूषण भार प्रवाहित होता है जो नदी जल में मिश्रित होने के बाद पहले से ही कम घुलित ऑक्सीजन की मात्रा को और अधिक कम कर देता है। इसकी वजह से अकार्बनिक स्थिति उत्पन्न होती है और इसमें बैक्टीरिया पनपते हैं।
सांसों में घुल रहा जहर
प्रदूषण का स्तर कम होने की जगह लगातार बढ़ रहा है। नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स के मुताबिक रविवार सुबह 11 बजे तक फरीदाबाद में पीएम 2.5 का स्तर सामान्य से नौ गुणा तक बढ़कर 500 माइक्रोग्राम/घन मीटर तक पहुंच गया। दोपहर दो बजे 498 और शाम चार बजे 497 दर्ज किया गया। इससे पूर्व शनिवार शाम सात बजे यह आंकड़ा 500 तक पहुंचा था। प्रदूषण के लिहाज से दिल्ली और फरीदाबाद की आबोहवा सबसे खराब रही। जबकि गुड़गांव में भी पीएम 2.5 की मात्रा शाम चार बजे तक 484 माइक्रोग्राम/घन मीटर थी।
पिछले दिनों कुछ यूं रहा प्रदूषण का स्तर
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तारीख पीएम 2.5 (माइक्रोग्राम/घन मीटर)
06 नवंबर 500
05 नवंबर 500
04 नवंबर 500
03 नवंबर 500
02 नवंबर 500
01 नवंबर 500
(नोट: आंकड़े अधिकतम में हैं। पीएम 2.5 का सामान्य स्तर 60 माइक्रोग्राम/घन मीटर माना जाता है।)
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प्रदूषण की मार आस्था पर भी भारी पड़ती दिखाई दी। इस बार हवा ही नहीं बल्कि जहरीले पानी का असर छठ महापर्व पर भी दिखा। गंदे नाले में तब्दील हो चुकी आगरा और गुड़गांव कैनाल से श्रद्धालु दूरी बनाते दिखे। एक अनुमान के मुताबिक एनसीआर में छठ महापर्व मनाने के लिए तकरीबन 20 लाख से ज्यादा लोग जुटते हैं, लेकिन यमुना से लेकर हिंडन, आगरा और गुड़गांव कैनाल तक के घाटों पर प्रदूषण का असर दिखा।
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औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में छह लाख से ज्यादा लोग छठ पूजा करते हैं, लेकिन इस बार 60 फीसदी लोगों ने पारंपरिक घाट यानि आगरा और गुड़गांव कैनाल के किनारों से मुंह फेर लिया। पल्ला पुल, ऐतमादपुर, ओल्ड और सेक्टर तीन में नहर के किनारे कृत्रिम घाट बने दिखाई दिए। कुछ ऐसा ही नजारा दिल्ली में कालिंदी कुंज से लेकर फरीदाबाद बॉर्डर तक दिखाई दिया। नहर के किनारे तैयार किए गए घाट सूने-सूने दिखे। इस बार अधिकांश जगह पार्क और छतों पर भी छोटे-छोटे कृत्रिम घाट बना छठ पूजा की परंपरा निभाई जा रही है।
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न यमुना सुरक्षित न नहरें
दिल्ली में वजीराबाद बैराज से ओखला बैराज तक यमुना का स्ट्रैच सबसे प्रदूषित बताया जाता है। ओखला बैराज से कालिंदी कुंज होती हुई यमुना से आगरा कैनाल निकलती है। मौजूदा समय में इसकी दशा और ज्यादा बुरी है। दिल्ली की सरहद में 22 बड़े नाले यमुना को प्रदूषित कर रहे हैं, जबकि इससे आगे फरीदाबाद की सरहद में भी कई नाले प्रदूषण फैला रहे हैं। घरेलू व औद्योगिक स्रोतों से अनुपचारित अपशिष्ट जल के प्रदूषक तत्वों के जरिये गंदगी फैलाते हैं। रोजाना हजारों मिलियन लीटर अपशिष्ठ जल यमुना व आगरा कैनाल में जा रहा है। नालों से बहती गंदगी से उच्च कार्बनिक प्रदूषण भार प्रवाहित होता है जो नदी जल में मिश्रित होने के बाद पहले से ही कम घुलित ऑक्सीजन की मात्रा को और अधिक कम कर देता है। इसकी वजह से अकार्बनिक स्थिति उत्पन्न होती है और इसमें बैक्टीरिया पनपते हैं।
सांसों में घुल रहा जहर
प्रदूषण का स्तर कम होने की जगह लगातार बढ़ रहा है। नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स के मुताबिक रविवार सुबह 11 बजे तक फरीदाबाद में पीएम 2.5 का स्तर सामान्य से नौ गुणा तक बढ़कर 500 माइक्रोग्राम/घन मीटर तक पहुंच गया। दोपहर दो बजे 498 और शाम चार बजे 497 दर्ज किया गया। इससे पूर्व शनिवार शाम सात बजे यह आंकड़ा 500 तक पहुंचा था। प्रदूषण के लिहाज से दिल्ली और फरीदाबाद की आबोहवा सबसे खराब रही। जबकि गुड़गांव में भी पीएम 2.5 की मात्रा शाम चार बजे तक 484 माइक्रोग्राम/घन मीटर थी।
पिछले दिनों कुछ यूं रहा प्रदूषण का स्तर
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तारीख पीएम 2.5 (माइक्रोग्राम/घन मीटर)
06 नवंबर 500
05 नवंबर 500
04 नवंबर 500
03 नवंबर 500
02 नवंबर 500
01 नवंबर 500
(नोट: आंकड़े अधिकतम में हैं। पीएम 2.5 का सामान्य स्तर 60 माइक्रोग्राम/घन मीटर माना जाता है।)