#DelhiSmog : 15 साल पुराने डीजल वाहनों का रजिस्ट्रेशन रद्द होना शुरु, 14 तक निर्माण पर रोक
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राजधानी में सिर्फ धार्मिक आयोजन को छोड़कर बाकी शादी, जन्मदिन पार्टी समेत किसी भी तरह के आयोजन-उत्सव में पटाखा प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह फैसला दिल्ली में बढ़े प्रदूषण के कारण उठाए जाने वाले लघु अवधि प्रावधानों के तहत उपराज्यपाल नजीब जंग की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया है।
सोमवार को आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत चार कैबिनेट मंत्री, पर्यावरण विशेषज्ञ सुनीता नारायण, अनुमिता राय चौधरी, आईआईटी दिल्ली की प्रो. मंजू मोहन और अधिकारी शामिल हुए।
उपराज्यपाल 15 नवंबर को शाम 3 बजे फिर से राजधानी में प्रदूषण के हालात और उपायों को लेकर समीक्षा बैठक करेंगे। बैठक में पटाखों पर प्रतिबंध, निर्माण व तोड़फोड़ प्रतिबंध समेत लघु अवधि उपायों को आगे बढ़ाने या खत्म करने पर फैसला होगा। उपराज्यपाल ने कहा है कि सरकार और नागरिकों के बीच अच्छे तालमेल से ही प्रदूषण कम किया जा सकता है।
निर्माण व तोड़फोड़ पर 14 नवंबर तक प्रतिबंध लगा
बैठक में 15 साल से पुराने सभी डीजल वाहनों को डी-रजिस्टर करने का फैसला भी लिया गया है। इस मामले में सभी मोटर लाइसेंसिंग अधिकारियों को चरणबद्ध तरीके से ऐसे वाहनों को डी-रजिस्टर करने की कार्रवाई करने के निर्देश भी जारी किए गए।
वहीं दिल्ली में किसी भी तरह के निर्माण व तोड़फोड़ पर 14 नवंबर तक प्रतिबंध लगा दिया गया है। एमसीडी व पुलिस तोड़फोड़ करने वालों पर कार्रवाई करेगी तो दिल्ली सरकार को विज्ञापन जारी करने के लिए कहा गया है।
करीब डेढ़ घंटे तक चली बैठक में प्रदूषण नियंत्रण के विशेष उपाय और तात्कालिक कदम पर चर्चा की गई। उपराज्यपाल ने सभी एजेंसियों को मिलजुलकर निर्णयों का उत्तरदायित्व लेने और उसे सख्ती से लागू करने को कहा है।
एमसीडी को भलस्वा लैंडफिल साइट में आग पर काबू पाने के लिए जरूरत पड़े तो लोक निर्माण विभाग का मलबा और जलशोधन संयंत्रों की कीचड़ का इस्तेमाल करने को कहा गया है।
ओवरलोड ट्रक व दूसरे राज्यों से आने वाले ट्रकों की नो-एंट्री
उपराज्यपाल ने बैठक में परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस को निर्देश दिए हैं कि ओवरलोड ट्रक व दूसरे राज्यों से आने वाले ट्रकों की बॉर्डर पर तत्काल प्रभाव से नो-एंट्री करें।
विशेषतौर पर जो ट्रक राजस्थान, हरियाणा व यूपी से आते हैं। उपराज्यपाल ने प्रदूषण प्रमाणपत्रों की सख्ती से जांच और उल्लंघन करने वाले वाहन मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
गैर औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाली फैक्टरी को बंद करने के लिए एमसीडी और पुलिस की संयुक्त टीमें अभियान चलाएंगी। खुले में पत्ती, टायर, रबर या प्लास्टिक जाने वालों के खिलाफ संबंधित एजेंसी अभियान चलाए और रोस्टर बनाकर जांच हो। जो अधिकारी लापरवाही बरते उसके खिलाफ कार्रवाई भी होगी।