ये हैं वो छह कारण जिसकी वजह से केजरीवाल नहीं बन सकते पंजाब के सीएम
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लेकिन कम से कम छह ऐसी वजहें हैं- जिनकी वजह से केजरीवाल के लिए पंजाब का मुख्यमंत्री बनना टेढ़ी खीर हो सकती है।
पंजाब विधानसभा की कुल 117 सीटों के लिए अगले साल चुनाव होने हैं।
केजरीवाल के मुख्यमंत्री बनने की राह में पहला और सबसे बड़ा रोड़ा साबित हो सकता है उनका सिख न होना।
पंजाब देश का इकलौता सिखबहुल राज्य है। अगर केजरीवाल को मुख्यमंत्री के रूप में पेश किया जाता है, तो सिख मतदाताओं का उनके ख़िलाफ़ ध्रुवीकरण हो सकता है।
पानी बन सकता है केजरीवाल के लिए मुसीबत
दूसरा, ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि केजरीवाल के विरोधी उन्हें निरंकारी संप्रदाय से जोड़ने की कोशिशें कर रहे हैं। पंजाब में निरंकारियों और जरनैल सिंह भिंडरवाले के नेतृत्व वाले सिखों के बीच ख़ूनी झड़पों का लंबा दौर चला और इससे राज्य क़रीब दो दशक तक चरमपंथी ताक़तों की गिरफ़्त में रहा।
तीसरी वजह है पानी का बँटवारा। यह मुद्दा इसलिए भी गर्म है कि इसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने बड़ा राजनीतिक दांव चलते हुए इस मुद्दे पर केंद्र को उनकी सरकार को बर्खास्त करने तक की चुनौती दे डाली है।
केजरीवाल मूलरूप से भिवानी से हैं और सतलुज के पानी का झगड़ा भी पंजाब और हरियाणा के बीच ही है। अकालियों ने पंजाब में बनी सतलज यमुना लिंक नहर को कई जगह पर तोड़ दिया है।
गैर पंजाबी का राज करना मुश्किल
चौथी वजह है केजरीवाल की हरियाणा की पैदाइश। इससे पंजाब से कांग्रेस पर निशाना साधने में वह कमज़ोर पड़ जाएंगे। वैसे भी किसी ग़ैर पंजाबी का पंजाब पर राज करना बड़ा मुद्दा रहा है।
पंजाब परंपरागत रूप से ख़ुद को ख़ास मानता रहा है और ब्रितानियों ने भी उन्हें यह मान्यता दी थी। शोधकर्ताओं का भी कहना है कि खालिस्तान आंदोलन में कई मुद्दों पर भारतीय संविधान के तहत स्वायत्तता पाने की ख़्वाहिश थी।
अविभाजित भारत में पंजाब उत्तर प्रदेश के बराबर हुआ करता था और इसकी सीमा पाकिस्तान के पेशावर से लेकर हरियाणा के पलवल तक होती थी।
राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को लगेगा धक्का
पांचवां, अगर केजरीवाल पंजाब की सत्ता संभालते हैं तो पार्टी एक व्यक्ति की पार्टी नज़र आएगी और इससे राष्ट्रीय स्तर पर इसकी महत्वाकांक्षाओं को भारी धक्का लगेगा।
छठी वजह है कि अगर केजरीवाल पंजाब की सत्ता संभालते हैं, तो उन्हें मीडिया की उतनी तवज्जो शायद न मिले जितनी उन्हें दिल्ली का मुख्यमंत्री होने पर मिलती है।
दिल्ली को अभी राज्य का पूर्ण दर्जा हासिल नहीं है और विभिन्न मुद्दों पर मोदी सरकार के साथ उनकी टकराहट मीडिया में सुर्खियां बनती रहती है। भारतीय जनता पार्टी ने भी 2012 में उत्तर प्रदेश में उमा भारती को मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में उतारा था, लेकिन पार्टी मतदाताओं को प्रभावित नहीं कर सकी थीं।