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दिल्ली में नहीं है लोगों का दिल महफूज, जीबी पंत में ईको जांच के लिए छह माह की वेटिंग

Fri, 19 Jul 2019 04:28 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Fri, 19 Jul 2019 04:28 AM IST
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six months Waiting for Echo test in GB Pant Hospital, Delhi
gb pant hospital - फोटो : अमर उजाला

देश की राजधानी दिल्ली को दिलवालों का शहर कहा जाता है, लेकिन अब यह दिल भी महफूज नहीं है। आधुनिक जीवनशैली जान की दुश्मन बन गई है। सरकारी तंत्र भी लोगों को हार्टअटैक से बचाने में असफल है। ये बात हम नहीं, बल्कि दिल्ली सरकार के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल जीबी पंत के वरिष्ठ डॉक्टरों का मानना है। दिल्ली में करीब तीन सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल हैं, जहां मरीजों को दिल का उपचार मिलता है, लेकिन सुविधाएं नहीं होने के कारण एकमात्र जीबी पंत दिल्ली सरकार का अस्पताल है, जो अक्सर मरीजों को संजीवनी देता है। यह भी अब ओवरलोड चल रहा है।

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यहां के कार्डियोलॉजी विभाग के वरिष्ठ डॉ. प्रेम अग्रवाल का कहना है कि दिल्ली सहित देश में दिल के रोगियों की तादाद और उनकी मौत में लगातार वृद्घि हो रही है, लेकिन राजधानी के अस्पतालों में सुविधाओं का टोटा है। स्थिति यह है कि दिल की जांच में सहायक एक ईको जांच के लिए जीबी पंत में छह माह से ज्यादा तक मरीज को इंतजार करना पड़ रहा है। इसी विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर और गंभीर मामलों में देश के चुनिंदा विशेषज्ञों में से एक डॉ. विजय त्रेहन का कहना है कि दिल का रोग बुढ़ापे से युवावस्था की ओर से बढ़ चला है। असंतुलित जीवनशैली और नशे का सेवन इसकी मुख्य वजह है। जिन महिलाओं में खून की कमी होती है, उनमें भी कई बार दिल से जुड़े रोग मिल रहे हैं।
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जीबी पंत के अलावा जनकपुरी और ताहिरपुर में दिल्ली सरकार के दो सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल हैं, जहां कैथ लैब होने से दिल के रोगियों का उपचार किया जाता है। यहां दिन में ओपीडी के समय ही कैथ लैब चलता है, जबकि दिल्ली के दो छोर पर मौजूद इन अस्पतालों में सुविधाओं पर जोर दिया जाए तो लोगों को हार्टअटैक आने के बाद सीमित समय के भीतर बचाया जा सकता है। इस ओर दिल्ली सरकार को भी ध्यान देना चाहिए। 

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साकेत स्थित मैक्स अस्पताल के डॉ. विवेका कुमार का कहना है कि देश में गैर संक्रमणकारी रोग यानि एनसीडी का प्रकोप काफी बढ़ चला है। दिल की बीमारियों और स्ट्रोक से देश में 80 फीसदी से ज्यादा मौत हो रही हैं। इनमें से ज्यादातर मामले ऐसे हैं, जिन्हें हार्टअटैक आने के बाद समय पर इलाज नहीं मिला। जिंदगियां बचाने के लिए जहां सरकार को चिकित्सीय सेवाओं पर फोकस करना होगा। वहीं, लोगों को भी जागरूक होना पड़ेगा।

 दिल्ली मिशन से 15 को मिली जिंदगी
दिल्ली एम्स और आईसीएमआर की संयुक्त पहल मिशन दिल्ली के तहत अब तक 79 दिन में 15 लोगों को नया जीवन मिल चुका है। मिशन दिल्ली के तहत बाइक एंबुलेंस शुरू की गई थी, जो एम्स के आसपास के क्षेत्रों में चलती हैं। टोल फ्री नंबर 14430 पर कॉल कर इसकी सेवाएं ली जा सकती हैं। हाल ही में बाइक एंबुलेंस और उसके प्रशिक्षित कर्मचारियों ने हौजखास अपार्टमेंट निवासी एक व्यक्ति की हार्टअटैक आने के बाद महज 10 मिनट के भीतर घर पहुंच प्राथमिक चिकित्सा देकर जान बचाई थी।

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