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नोएडा के छह और बिल्डरों के फ्लैट ढहाए जाएंगे

Tue, 25 Nov 2014 09:46 PM IST
Updated Tue, 25 Nov 2014 09:46 PM IST
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six builders flat will be demolished in Noida.
नोएडा के सर्फाबाद में फ्लैट खरीदारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्राधिकरण ने छह बिल्डरों को नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह में निर्माण ढहाने का आदेश जारी कर दिया है।
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प्राधिकरण के मुताबिक, सर्फाबाद के खसरा नंबर 70, 73, 77, 79, 80, 88, 89, 91, 94 व 95 की जमीन पर अवैध फ्लैटों का निर्माण किया गया है। निर्माण से पूर्व प्राधिकरण की अनुमति नहीं ली गई है जबकि ये नोएडा सेक्टर-72 व 73 की जमीन है और नोएडा के अधिसूचित क्षेत्र में है।
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इन खसरा नंबरों की जमीन पर आशी कंस्ट्रक्शन, अदिति बिल्डकॉन, सुभम इंफ्राटाउन प्राइवेट लिमिटेड, सिंघल रेजीडेंसी, अरविंद जैन, प्रदीप जैन व जितेंद्र और विनर ग्रुप ने फ्लैटों का निर्माण कर लिया है।
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मंगलवार को इन्हें नोटिस जारी किया गया है। साथ ही, मौके पर चस्पा भी कर दिया गया है। नोटिस में अवैध निर्माण को सप्ताह भर में स्वयं गिराने को कहा गया है। ऐसा न करने पर प्राधिकरण खुद से निर्माण गिराएगा। निर्माण का खर्च भी इन बिल्डरों से वसूलने चेतावनी दी गई है।

इन बिल्डरों के अलावा नोएडा के किसी भी डूब क्षेत्र, अधिसूचित या कब्जा प्राप्त जमीन पर कोई भी अवैध कब्जा करेगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। निर्माण ढहाने के अलावा उसके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज होगा। गांवों के आसपास अवैध रूप से बन रहे फ्लैट गिराए जाएंगे। ये सभी निर्माण बिना प्राधिकरण की अनुमति के नियम कायदों को ताक पर रखकर हो रहे हैं।
- राजेश प्रकाश, प्राधिकरण के एसीईओ

पांच हजार फ्लैट बने होने का अनुमान

six builders flat will be demolished in Noida.

5 से 6 हजार फ्लैट अवैध बने होने का अनुमान है। इनमें ज्यादातर फ्लैट बिक चुके हैं या फिर उनकी बुकिंग हो रही है। ऐसे में बिल्डरों से ज्यादा नुकसान फ्लैट खरीदारों को उठाना पड़ सकता है। इनमें ज्यादातर फ्लैट खरीदार मध्यवर्गीय परिवार से हैं जो सेक्टरों की तुलना में रेट कम होने से अपनी गाढ़ी कमाई यहां लगा चुके हैं।

कावेरी प्रकरण बन रहा नजीर
इलाबास गांवों के आसपास बन रहे फ्लैटों पर कार्रवाई की शुरुआत इलाबास के कावेरी सोसायटी प्रकरण से हुई। इसके बाद भंगेल के एक दर्जन बिल्डर प्रोजेक्ट का काम प्राधिकरण ने रुकवाया। अब सर्फाबाद के बिल्डरों पर कार्रवाई की जा रही है। कावेरी सोसायटी का विवाद तो न्यायालय तक पहुंचा, लेकिन कोर्ट ने कह दिया कि बिल्डर सभी कागजात प्राधिकरण में जमा करें। प्राधिकरण उनकी जांच करके फैसला ले।

बनने के बाद जागा प्राधिकरण
प्राधिकरण ने सर्फाबाद के जिन प्रोजेक्टों को गिराने का नोटिस भेजा है, उनमें से कुछ तो पजेशन के लिए भी तैयार हो चुके हैं। ये छह-सात मंजिल तक बन चुके हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर इनका निर्माण शुरू होते समय क्यों नहीं रोका गया। उस समय रोक दिया जाता तो जनता का पैसा न फंसता।

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