छह विज्ञापन जिनसे खुली आप की ऐड पॉलिटिक्स की पोल
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आम आदमी पार्टी के लिए विवाद कोई नया मुद्दा नहीं है। पार्टी अपनी नीतियों और योजनाओं की वजह से कम और विवादों की वजह से ज्यादा सुर्खियां बटोरती है।
लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि अगर विवाद हर बार एक ही मुद्दे पर हो तो इसे क्या समझा जाए? जाहिर है या तो ये पार्टी की रणनीति का हिस्सा है या फिर पार्टी के पास जनता तक पहूंचने की कोई दूसरी नीति नहीं है।
ताजा विवाद आप सरकार के विज्ञापन बजट को लेकर है। दरअसल दिल्ली सरकार ने विज्ञापन पर खर्च के बजट को बढ़ा दिया है। जिससे दिल्ली का सियासी पारा भी बढ़ गया है और विरोधी पार्टीयां केजरीवाल सरकार पर तीखे हमले कर रही हैं।
विज्ञापन को लेकर आम आदमी पार्टी हमेशा विरोधियों के निशाने पर रही है। ऐसे में आम आदमी पार्टी की साफ-सुधरी पॉलिटिक्स का दावा धीरे-धीरे एड पॉलिटिक्स में तब्दील हो गया है।
जानिए आप के छह विवादित विज्ञापन
आम आदमी पार्टी की एड पॉलिटिक्स अबतक इन विज्ञापनों और इनके कंटेंट के कारण विवादों में रही है।
1- महिला सुरक्षा पर विवादित एफएम रेडियो जिंगल-
एफएम रेडियो पर प्रसारित किए गए आदमी पार्टी के इस विज्ञापन में एक लड़की जब रास्ते से अपने घर जा रही है तो कुछ व्यक्ति भद्दा कमेंट पास करते हैं।
इसकी शिकायत जब वह पुलिस स्टेशन करती है तो वहां लड़की से घटना का सबूत मांगा जाता है। इस पर लड़की पुलिस के सवालो से नाराज होकर बिना शिकायत दर्ज कराए वापस लौट जाती है। इसके बाद लोगों से अपील की जाती है कि महिला सुरक्षा के लिए आम आदमी पार्टी को वोट करें।
इस विज्ञापन पर दिल्ली पुलिस ने आपत्ति दर्ज कराई थी। पुलिस ने रेडियो स्टेशन से इसे बंद करने की बात कही थी साथ ही नसीहत दी गई थी कि ऐसे विज्ञापन या जिंगल चलाने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें।
केजरीवाल Vs किरणबेदी
2- ईमानदार Vs अवसरवादी-
विधानसभा चुनाव से पहले जब भाजपा ने पूर्व महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी को केजरीवाल से मुकाबले के लिए मुख्यमंत्री पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाया तो ये विज्ञापन सामने आया।
आप ने भाजपा उम्मादवार किरण बेदी के भाजपा के लिए राजनीति में कदम रखने के फैसले को अवसरवादिता से प्रेरित बताया। इस दौरान दिल्ली में कई जगह खासकर ऑटो के पीछे केजरीवाल और किरण बेदी के फोटो के साथ ईमानदार Vs अवसरवादी के पोस्टर लगे नजर आए।
भारतीय जनता पार्टी ने आप के इस विज्ञापन का कड़ा विरोध जताया था। इतना ही नहीं किरण बेदी ने खुद मीडिया में इस पर तीखी प्रतिक्रिया के साथ केजरीवाल पर अन्ना आंदोलन को याद करते हुए निशाना साधा था।
'जो कहा सो किया'
3- 'जो कहा सो किया' वादों पर खरा उतरने का बखान-
इस विज्ञापन में आम आदमी पार्टी अपने चुनावी वादों पर 'जो कहा सो किया' के माध्यम से खरा उतरने का दावा कर रही है। पार्टी ने 400 यूनिट बिजली और 20 हजार लीटर मुफ्त पानी का वादा पूरा करने का दावा इस विज्ञापन में किया।
जो कहा सो किया के इस विज्ञापन को आप ने व्यापक स्तर पर प्रचारित और प्रसारित किया। जिसका भाजपा और कांग्रेस ने जनता के पैसे की फिजूलखर्ची बताकर विरोध किया।
यहां तक कि विरोधियों ने पानी और बिजली के वादे पर खरा उतरने को आंकड़ों का खेल करार दिया।
'Mr. झूठे कौन से अफसर गिरफ्तार हुए '
4- 'भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग शुरू' 35 अफसर गिरफ्तार, 152 सस्पेंड
दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने एसीबी एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा भ्रष्ट अफसरों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई को इस विज्ञापन में पेश किया।
सरकार की ओर से इसमें बताया गया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग शुरू हो चुकी है। एसीबी ने इसमे तेजी से सख्त कार्रवाई करते 35 अफसरों को गिरफ्तार
किया और 152 सस्पेंड किए गए।
इस विज्ञापन में केजरीवाल का स्टेटमेंट 'भ्रष्टाचारियों को बख्शा नही जाएगा' भी लिखा था। इस पर विवाद उस वक्त हुआ जब भाजपा ने अफसरों के खिलाफ हुई इस कार्रवाई को फर्जी और झूठा बताया।
भाजपा ने केजरीवाल के विज्ञापन पर इसी अंदाज में सवाल उठाते हुए पोस्टर लगवाए। इन पोस्टरों में केजरीवाल के विज्ञापन पर लिखा था 'Mr. झूठे कौन से अफसर गिरफ्तार हुए नाम तो बताओ।' लिखा था।
हालांक भाजपा के सवाल का जवाब आम आदमी पार्टी ने प्रेस कांफ्रेंस के जरिए दिया था।
'गरीबों का मसीहा'
5- केजरी सरकार का बखान करता टीवी विज्ञापन-
हाल ही में आम आदमी पार्टी के एक टीवी विज्ञापन पर भी जमकर बवाल हुआ। ये विज्ञापन सरकारी विज्ञापनों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सुर्खियों में आया। जिसमें केजरीवाल को 'गरीबों का मसीहा' के तौर पर दिखाने के चलते हंगामा हुआ।
आप ने इस ऐड में विपक्षी पार्टियों प्रशासनिक अधिकारियों और मीडिया को खलनायक के तौर पर दिखाया था। जबकि, केजरीवाल को गरीबों के मसीहा के तौर पर पेश किया गया।
असल में टीवी चैनलों पर चल रहे इस ऐड पर आपत्ति की मुख्य वजह सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को माना गया, जिसमें कहा गया है कि सरकारी विज्ञापनों में मुख्यमंत्री, राज्यपाल या किसी भी नेता की तस्वीर नहीं लगाई जा सकती।
आम आदमी पार्टी के इस टीवी ऐड में भले ही केजरीवाल की तस्वीर नहीं दिखाई गई है लेकिन दो मिनट के इस विज्ञापन में कुल नौ बार केजरीवाल का नाम लिया गया। विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है।
विज्ञापन के लिए 526 करोड़ का बजट
6- 526 करोड़ का बजट 'जो कहा सो किया' 40 बार-
ताजा मामले के मुताबिक विज्ञापनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से बचने के लिए आम आदमी पार्टी सरकार ने नया कदम उठाया है। केजरीवाल सरकार ने सरकार की उपलब्धियां जनता तक पहुंचाने के लिए विज्ञापन पर 526 करोड़ रुपए खर्च करने का बजट रखा है।
आप सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बचने के लिए अब एफएम रेडियो पर ये विज्ञापन चलाएगी। दिल्ली सरकार ने इसके लिए रेडियो पर विज्ञापन बुक भी कर लिये हैं।
एक बार फिर 'जो कहा सो किया' के नाम से ये विज्ञापन अलग-अलग रेडियो स्टेशन पर कई बार चलेगा। सरकार की इस नीति पर कांग्रेस और भाजपा ने विरोध जताया है।
बताया जा रहा है कि इसी को लेकर रेडियो पर एक 76 सेकेंड विज्ञापन भी चल रहा है। ये विज्ञापन दिनभर में 40 बार चलता है। गौरतलब है कि शीला दीक्षित सरकार के दौरान 2013-14 में विज्ञापन का बजट तकरीबन 33 करोड़ था। लेकिन आम आदमी पार्टी ने इसे कई गुना बढ़ाकर 526 करोड़ कर दिया है।