'डिप्टी सीएम' मनीष सिसोदिया की अनसुनी बातें
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आम आदमी पार्टी की नई सरकार में मनीष सिसोदिया को उपमुख्यमंत्री का दर्जा दिया जा सकता है। गाजियाबाद में पिलखुवा में एक स्कूल प्रिंसिपल के घर में जन्मे मनीष सिसोदिया भावी दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सबसे पुराने सहयोगी और सबसे करीबी मित्रो में हैं।
इस बार दिल्ली में अप्रत्याशित जीत के लिए बनी नीति व चुनाव लड़ने के लिए धन जुटाने नीति बनाने में उनकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हर सफलता-असफलता में केजरीवाल साथ निभाने वाले मनीष सिसोदिया 15 सालों से उनके साथ हैं। तब केजरीवाल और सिसोदिया ने मिलकर सूचना के अधिकार अधिनियम पर काम करने के लिए परिवर्तन नाम का एक एनजीओ शुरू किया था। वहां से आम आदमी पार्टी बनने तक मनीष ने केजरीवाल का पूरी ईमानदारी से साथ निभाया।
बिना सिसोदिया के कहीं नहीं जाते अरविंद केजरीवाल
इसीलिए जब पिछली बार दिल्ली आप की सरकार बनी तो मनीष सिसोदिया दूसरे नंबर रहे। लेकिन महज 49 दिनों में ही आप की सरकार चली गई। इसके बाद आप ने लोकसभा चुनाव लड़ा। उसमें आप को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा।
इस दौरान आप की चारों ओर आलोचना होने लगीं। लेकिन आप ने वापसी की। इसमें सबसे अहम भूमिका मनीष सिसोदिया निभाई। तभी आज केजरीवाल जहां जाते हैं, मनीष को लिए बिना नहीं जाते।
बुधवार को जब केजरीवाल दो केंद्रीय मंत्रियों और राष्ट्रपति से मुलाकात करने गए, तो सिसोदिया को नहीं भूले। आज जब पीएम से मिलने की बारी आई, तो अरविंद ने मनीष को ही अपने साथ चलने को कहा। अब सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि मनीष सिसोदिया को उप मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।
राजनीति से पहले ये करते थे सिसोदिया
मकैनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले मनीष सिसोदिया राजनीति में आने से पहले पत्रकार थे। उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो और जी न्यूज के साथ लंबे समय तक पत्रकार के रूप में काम किया था। लेकिन बाद में उन्होंने सामाजिक कार्यों के लिए पत्रकारिता छोड़ दी थी।
वह सूचना के अधिकार से जुड़े आंदोलन में केजरीवाल के साथ अहम भूमिका रहे। दिल्ली जल बोर्ड के निजीकरण के खिलाफ लड़ाई लड़ते रहे।
यही नहीं, वह जनलोकपाल आंदोलन के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और इसके साथ ही वह इसका पहला मसौदा तैयार करने वाले दल का भी हिस्सा थे। आंदोलन के दौरान जब अन्ना हजारे को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था, तब सिसोदिया को भी जेल भेजा गया था।
ये सिसोदिया का असली काम
पिछले साल लोकसभा चुनावों में दिल्ली की सातों संसदीय सीटों पर आप के हार जाने के बाद पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का श्रेय सिसोदिया को दिया जाता है।
आप सरकार के 49 दिन के कार्यकाल में सिसोदिया शिक्षा, लोक निर्माण विभाग, शहरी विकास एवं स्थानीय निकाय मंत्री थे। उस सरकार ने पिछले साल 14 फरवरी को लोकपाल के मुद्दे पर इस्तीफा दे दिया था।
सिसोदिया ने पटपड़गंज विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी के उम्मीदवार विनोद कुमार बिन्नी को हराकर यह जीत हासिल की है। विनोद कुमार बिन्नी को पिछले साल आप से निकाल दिया गया था।