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सिंघु बॉर्डर : चिकित्सा शिविरों में 30 फीसदी से अधिक मरीज आसपास के गांवों के
Wed, 09 Dec 2020 01:47 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Wed, 09 Dec 2020 01:47 AM IST
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चिकित्सक सेवा का लाभ उठाते लोग
- फोटो : amar ujala
बॉर्डर के आसपास अलीपुर, कोंडली, लामपुर, सिंघु सहित तमाम गांवों के किसान आंदोलन स्थल पर लगने वाले चिकित्सा शिविर बेहद फायदेमंद साबित हो रहे हैं। रास्ते बंद होने की वजह से गांवों से अस्पताल पहुंचना भले ही मुश्किल है, लेकिन पिछले करीब दो हफ्ते से उन्हें अगर किसी भी तरह की शारीरिक परेशानी होती है तो डॉक्टर और दवाईयां आसानी से उपलब्ध हैं।
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बबली अपने बच्चों के साथ सिंघु बॉर्डर पहुंची। बबीता को सर्दी और खांसी जबकि साक्षी के कमजोर होने से चिंतित बबली शिविर में पहुंची। कोंडली निवासी महिला ने कहा कि बच्चों को डॉक्टर ने दवाइयां दे दी है। ठीक इसी तरह गांव अलीपुर के मंगत सिंह अपने पैरों के इलाज के लिए पहुंचे। उनके पुत्र भीम सिंह ने बताया कि बॉर्डर पर 12 चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं। जहां रोजाना करीब 200 मरीजों की जांच के बाद दवाएं भी मुफ्त में दी जा रही है। डॉ. मृदुला ने बताया कि चिकित्सा कर्मी 24 घंटे काम कर रही है, दोपहर में भीड़भाड़ होने की वजह से कम मरीज होते हैं, लेकिन रात के वक्त संख्या बढ़ जाती है।
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डॉ. दविंदर कौर के मुताबिक उनकी टीम में ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी वाले मरीज पहुंच रहे हैं। अगर पहले के इलाज की पर्ची हैं तो उन्हें आगे भी देखते हैं अन्यथा टेस्ट और सलाह के बाद भेज दे रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि 30-40 फीसदी मरीज आसपास के गांवों के हैं। डॉ. कौर ने तीन बजे सौ से अधिक मरीजों की जांच के बाद उन्हें सलाह दी, लेकिन शाम तक यह संख्या काफी बढ़ गई।
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संक्रमण का नहीं है डर
बॉर्डर के दोनों तरफ हजारों की संख्या में किसान आंदोलन के समर्थकों की भीड़ में मास्क पहनने वालों की संख्या काफी कम दिखी। पूछने पर उनका कहना था कि उनके शहरों में कोरोना संक्रमण का खतरा नहीं है और बचाव के सभी एहतियात बरत रहे हैं।