एड्स के बाद ऐसे भटकते हैं मरीज, जानिए रोग का राज
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हमेशा ही एड्स के बारे में समाज में कई भ्रम प्रचलित रहे हैं। इसे असुरक्षित यौन संबंधों के साथ-साथ कई दूसरी चीजों से भी जोड़ा गया। हालांकि कुछ समय बाद जागरूकता के तौर पर लोगों ने इसे स्वीकार भी किया।
योजना को अमली जामा पहनाया गया तो एचआईवी रोगियों के रिकार्ड के साथ ही उनकी फोटो भी ऑनलाइन होगी। हालांकि एचआईवी रोगियों की जानकारी गुप्त रखने के नियम का पूरा पालन किया जाएगा।
रिकार्ड की तरह ही फोटो भी सरकारी एचआईवी काउंसलर ही देख सकेंगे। जिला अस्पताल के एचआईवी काउंसलिंग विभाग के परामर्शदाता मनोज ने बताया कि एक जगह एचआईवी की पुष्टि होने पर रोगी दूसरे स्थान पर भी जांच कराने पहुंच जाता है।
इसलिए भटकते रहते हैं एड्स के रोगी
एक समय महावारी का रूप ले एड्स के बारे में कई कहानियां सामने आई। लेकिन तमाम जागरूकता और बेहतरी के दावों के साथ शायद अभी भी सुधार बाकी है।
वहां पर भी पुष्टि होने पर उसे विश्वास नहीं होता है और वह तीसरी जगह जांच कराता है। ऐसे में एक ही रोगी के कई जगह रिकार्ड बन जाते हैं। इस स्थिति में मरीजों की सही संख्या की जानकारी नहीं हो पाती है।
इस परेशानी को खत्म करने के लिए कि यूपी एड्स कंट्रोल सोसायटी रिकार्ड की तरह ही मरीज की फोटो भी ऑनलाइन करने की तैयारी में है। मरीज यदि दूसरे स्थान पर जांच कराने पहुंचेगा तो फोटो से पहचान लिया जाएगा। योजना पर काम चल रहा है।