नेताओं के इन पोस्टरों में छिपा है एक संकेत
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लोकसभा और विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद एक बार फिर से शहर में पोस्टरवार शुरू हो गया है। यह वार स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर है। जगह-जगह पर ऐसे होर्डिंग लगाए गए हैं जिससे आभास होने लगा है स्थानीय निकाय चुनाव की नेता अभी से तैयारी करने लगे हैं।
विधानसभा चुनाव में आए अप्रत्याशित परिणाम से नगर निगम का चुनाव लड़ने वालों की नींद गायब है। जो लोग क्षेत्रीय पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ कर सदन में पहुंचे थे। वह अब जनता की नब्ज अपने तरीके से टटोलने में लगे हैं। शहर की सड़कों पर लगे पोस्टरों से साफ जाहिर हो रहा है कि उक्त व्यक्ति स्थानीय विधायक व पार्टी की पहल कर अपने को साबित करने का प्रयास कर रहा है।
इन पोस्टरों में दीपावली, भैयादूज, विधायक बनने व प्रदेश में भाजपा के सरकार के गठन की बधाई दी गई है। पोस्टर लगवाने वालों में ऐसे नेता है जिनको पांच साल तक केई नहीं जानता था। वैसे नगर निगम के सदन में भाजपा से संबध रखने वालों की संख्या अधिक है।
बाहरी वोट में बदलाव से भी है बेचैनी
मगर पांच साल तक जिन पार्षदों ने इधर से उधर पाला बदला है उनको चुनाव में जनता के सामने जाना भारी पड़ सकता है। शहर के एक खास क्षेत्र से संबध रखने वाले पाषर्द तो लोकसभा से लेकर विधानसभा के चुनाव में हर पार्टी के यहां हाजिरी लगाते नजर आ रहे थे।
विधानसभा में बाहरी वोट के भरोसे लड़ने का दावा करने वालों के लिए आए परिणाम से बहुत से वर्तमान पार्षदों में हलचल है। पहली बाहर बाहरी लोगों की ओर से सदन में अपनी मौजूदगी का विचार चल रहा है।
इस बार निकाय चुनाव सवा लाख बाहरी मतदाता भाग लेंगे। जबकि पीछले चुनाव में इनकी संख्या 70 हजार थी। समाजिक कार्यकर्ता बीएन लाल कहते हैं कि सदन में अप्रवासी लोगों की कालोनी के विकास के लिए सोचने वालों की भी मौजूदगी होनी चाहिए।