'राजधानी में धार्मिक स्थलों पर नहीं होने चाहिए हमले'
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हाईकोर्ट ने राजधानी में धार्मिक स्थलों पर हमलों के संबंध में दायर याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत ने इस बात पर सहमति जताई कि किसी भी धार्मिक स्थल पर हमले नहीं होने चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी व न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने चर्चों पर हमले रोकने के संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि वे इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हैं।
अदालत ने कहा कि वे इस बात पर भी विचार करेंगे कि सभी धार्मिक स्थलों पर हमले रुकने चाहिए। इससे पूर्व केंद्र सरकार ने याचिका पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह सांप्रदायिक याचिका है।
केंद्र सरकार के अधिवक्ता अनिल सोनी ने कहा कि मात्र चर्च का ही मामला क्यों उठाया गया है। हमारा मानना है कि पूजा के सभी स्थानों में भेदभाव किए बिना सभी धर्मों की रक्षा की जानी चाहिए।
सभी धार्मिक पूजा स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं
अधिवक्ता अनिल सोनी ने कहा कि याची ने मात्र चर्च तक ही अपनी याचिका को सीमित रखा है। हमले मंदिर, गुरुद्वारों व मस्जिदों पर भी हुए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013-14 के दौरान राजधानी में 200 मंदिरों, 30 गुरुद्वारे और 14 मस्जिदों और 6 चर्चों में तोड़फोड़ हुई है।
हम एक समाज को वरीयता नहीं दे सकते। हम सभी धार्मिक पूजा स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं। यह याचिका अधिवक्ता रीगन एस. बेल ने दायर की है।
याचिका में उन्होंने कहा कि दिसंबर से अब तक पांच चर्च पर हमले हो चुके है लेकिन एक को छोड़कर अन्य मामलों को सुलझाया नहीं जा सका। ऐसे में अदालत सरकार को सुरक्षा प्रदान करने के अलावा तोड़ी गई चर्च को मूल रूप में लाने का निर्देश दे।