खुलकर बोलीं शीला, निशाने पर लवली?
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दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने एक चैनल को दिए गए साक्षात्कार में साफ किया है कि मेरे दिल्ली आने से युवा नेताओं को डरने की कोई जरूरत नहीं है।
प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता युवा हैं। ये तो मेरे केरल जाने से पहले ही बन गए थे तो डरने की क्या जरूरत है।
वहीं यह भी साफ किया है कि मैं दिल्ली की राजनीति से खुद को हटा भी नहीं रही लेकिन तेजी से बढ़ भी नहीं रही हूं। अभी मैं दिल्ली का चेहरा नहीं बन रही हूं। केन्द्रीय नेतृत्व की बात है तो यह हाईकमान को तय करना है।
भाजपा के पास नंबर है तो सरकार बनाने वाले बयान को अभी भी अलग नहीं किया है। शीला दीक्षित ने कहा है कि मैंने कुछ गलत नहीं कहा है।
शीला ने कुछ यूं दी सफाई
उन्होंने कहा कि यह परंपरा रही है जो बड़ी पार्टी होती है, वह सरकार बनाती है। विवाद क्यों हुआ, ये मुझे समझ में नहीं आया। किसी भी बात को विवाद बना देते हैं।
सरकार बनाने के लिए किसी आमंत्रित करना है, यह उपराज्यपाल को फैसला लेना है। कांग्रेस के नेता की तरफ से तीखे बयान पर शीला ने कहा कि वे मेरी बात नहीं समझ पाए।
शीला दीक्षित ने कहा है कि मैं दिल्ली में अपने लिए कोई रोल नहीं देख रही हूं। हमारी जो पार्टी है, उसमें दो-तीन लोग हैं ना प्रदेश कांग्रेस में। मैं उसके लिए कोई टेंशन नहीं लेती कि दखल दूं या राय दूं। जो करेंगे ठीक ही करेंगे।
पार्टी की राजनीति में सक्रियता की एक उम्र तय होने के सवाल पर शीला दीक्षित ने कहा कि जब तक इंसान काम कर सकता है। पार्टी के लिए सहयोग दे सकता है, उम्र मैटर नहीं करती। अगर सहयोग नहीं दे रहा है तो उसका कोई मतलब नहीं है।