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मनचलों की जमकर खबर लेती है दबंग महिला ऑटो ड्राइवर

Mon, 02 Nov 2015 05:24 PM IST
Updated Mon, 02 Nov 2015 05:24 PM IST
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she fearless, she is dabang she is sole lady auto driver of ghaziabad and noida

सभी सामाजिक बंधनों को तोड़ते हुए एक तीस वर्षीय महिला गाजियाबाद और नोएडा की इकलौती ऑटोरिक्शा चालक बन गई है। इसे उसकी बहादुरी ही कहेंगे क्योंकि इस क्षेत्र को अब भी मर्दों का ही काम माना जाता है।

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हम बात कर रहे हैं तीन बच्चों की मां रूबी सिंघल की जिसने करीब 6 साल पहले ड्राइविंग को अपना काम चुना था क्योंकि उस वक्त उसका परिवार भारी आर्थिक तंगी से गुजर रहा था।
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रूबी बताती है कि अपनी कमाई में से वो अन्य खर्चों के साथ ही अपने बच्चों की स्कूल फीस भी भरती है। रूबी कहती है कि लोग जब उसे ऑटो चलाते हुए देखते हैं तो उन्हें बहुत आश्चर्य होता है क्योंकि ऑटो चलाना आज भी मर्दों का काम माना जाता है।

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परिवार के विरोध के बाद भी रही फैसले पर अडिग

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रूबी ने अपने ड्राइविंग के करियर की शुरूआत के बारे में बताते हुए कहा कि मेरे पिता और मेरे पति मेरे ऑटोरिक्शा चलाने के खिलाफ थे, लेकिन मैं अपने प्लान के साथ आगे बढ़ी।

रूबी बताती हैं कि उनके इस कदम से नाराज उनके पिता ने उन्हें अपने घर में घुसने से ‌मना कर दिया था। लेकिन पिता की बेरुखी भी रूबी को उनके फैसले से डिगा नहीं पाई और उन्होंने ऑटो चलाकर अपने परिवार की आर्थिक रूप से सहायता करना तय किया।

रूबी ने बताया कि किस तरह उनके भाई ने उनके इस कदम में उनकी मदद की। उनके भाई ने उन्हें नया ऑटो खरीदने के लिए पैसा भी दिया। जब रूबी ने कमाकर अपने पति की आर्थिक सहायता करनी शुरू कर दी तो उन्होंने पति का भी भरोसा जीत लिया।

गुंडों की कर चुकी है पिटाई

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रूबी अपने परिवार के बारे में बताते हुए कहती हैं कि उनके पति अजय सिंघल एक छोटा ट्रांसपोर्ट का बिजनेस करते हैं। उनके दो बेटे और एक बेटी है जो गाजियाबाद के प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं।

वो बताती हैं कि उनका घर गाजियाबाद के भीम नगर में जहां बहुत कम लोग अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में भेजते हैं। उन्होंने कक्षा 8 तक पढ़ाई की है इसलिए वो पढ़ाई का महत्व जानती हैं।

जब उनसे पूछा गया कि क्या वो नोएडा और गाजियाबाद में बढ़ते अपराध से डरती नहीं तो वो कहती हैं कि वो एक निडर महिला हैं। कुछ साल पहले का एक वाकया याद करते हुए रूबी कहती हैं कि एक बार उनके ऑटो में कुछ गुंडे बैठ गए थे।

उन गुंडों ने किराया देने से मना तो किया ही साथ ही रूबी को गालियां भी दीं। इस पर रूबी ने आव देखा न ताव और सरेआम उन गुंडों की पिटाई भी कर दी।

'दबंग होकर जिओ'

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रूबी बताती हैं कि इन 6 सालों के दौरान उन्होंने जीने का एक अनोखा तरीका सीख लिया है। इंसान को दबंग होकर जीना चाहिए। वो कभी किसी गुंडे को पीटने से पहले दोबारा नहीं सोचती।

वो कहती हैं कि वो जो हैं जैसी हैं उसमें खुश हैं। रूबी को लगता है कि हर वो स्त्री जो आर्थिक संकट से गुजर रही है उसे काम करना शुरू कर देना चाहिए।

रूबी का भाई पवन जैन जो खुद एक ऑटो चालक है बताता है कि उसकी बहन निडर है और उसे उसकी कोई चिंता नहीं है। वो कहता है कि मैं हमेशा उसकी सहायता के लिए हूं लेकिन उसे बहुत कम ही किसी की मदद की जरूरत पड़ती है। वो अपने सभी हालातों से खुद ही लड़ लेती है।

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