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दिल्ली विधानसभा चुनावः सियासी धुरंधरों के बीच फंसी शकूर बस्ती सीट, कैसा है इस बार का समीकरण

Thu, 23 Jan 2020 02:46 PM IST
दुष्यंत शर्मा चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 23 Jan 2020 02:46 PM IST
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Delhi Assembly Elections 2020 Shakurbasti seat stuck in political circles
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020: शकूर बस्ती - फोटो : अमर उजाला

नई दिल्ली के बाद दूसरी सबसे हॉट मानी जा रही शकूर बस्ती विधानसभा सीट दिग्गजों के बीच सियासी जंग में फंसी है। हैट्रिक लगाने की कोशिश में मैदान में उतरे दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन का मुकाबला भाजपा से दो बार विधायक डॉ. सुरेश चंद्र वत्स से है, जबकि कांग्रेस ने पूर्व निगम पार्षद व इलाके मे सियासी पकड़ रखने वाले देवराज अरोड़ा को उतारा है।

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माना जा रहा है कि इस बार मुकाबला कांटे का होगा। यह इसलिए भी कि 2015 के विधानसभा चुनाव में आप की लहर होने के बावजूद जैन भाजपा प्रत्याशी डॉ. वत्स से बमुश्किल तीन हजार वोटों से जीत सके थी, जबकि लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा सीट पर हार-जीत का फासला लंबा था। शकूर बस्ती सीट पर भाजपा को 62.9 फीसदी वोट मिले थे, जबकि आप और कांग्रेस के खाते में सिर्फ 17.7 व 17.1 फीसदी वोट जा सके थे।

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जातिगत आंकड़ा

1. सामान्य वर्ग : 40 फीसदी
-पंजाबी : 14
-वैश्य : 12
-ब्राह्मण : 6
-अन्य : 8 

2. ओबीसी वर्ग : 28 फीसदी
-गुर्जर : 7
-जाट : 6
-यादव : 4
-अन्य : 11 

3. अनुसूचित जाति : 12 फीसदी
-मुस्लिम : 5
-प्रवासी : 15
*(नोट : आंकड़े राजनीतिक पार्टियों द्वारा जुटाए गए हैं।)

ताकत और कमजोरी

आप प्रत्याशी : सत्येंद्र जैन
मजबूती :
-बतौर दिल्ली सरकार के मंत्री स्वास्थ्य क्षेत्र व बुनियादी ढांचे में बदलाव के किए काम।
-पेशे से आर्किटेक्ट होने से प्रोफेशनल में पहचान।
-2013 व 2015 में विधायक होने से इलाके में कराया है विकास कार्य।

कमजोरी :
-बीते चुनाव में आप की लहर होने के बावजूद सिर्फ 3133 वोटों के अंतर से जीते।
-बतौर मंत्री भ्रष्टाचार के लगे हैं आरोप।
-आम मतदाताओं की पहुंच आसान नहीं।

भाजपा प्रत्याशी : डॉ. सुरेश चंद्र वत्स
मजबूती :
-बतौर विधायक दो बार काम करने का मौका मिलने से इलाके में पहचान है।
-पेशे से चिकित्सक, प्रोफेशनल का साथ मिल सकता है।
-दिवंगत केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली का करीबी होने से कार्यकर्ताओं से दिली रिश्ता।

कमजोरी :
-भाजपा और कांग्रेस के बीच अपनी आस्था बदली है।
-तकनीक फ्रेंडली होने की जगह पारंपरिक तरीके से करते हैं काम।
-युवा मतदाताओं में ज्यादा मशहूर नहीं।

कांग्रेस प्रत्याशी : देवराज अरोड़ा
मजबूती :
-पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीतिक होने से इलाके में पकड़ मजबूत।
-निगम पार्षद होने के साथ बीते करीब 20 साल से इलाके में सक्रिय।
-कार्यकर्ताओं के बीच गहरी पैठ।

कमजोरी
-पहली बार लड़ रहे हैं विधानसभा चुनाव।
-निगम सीट आरक्षित होने के बाद चुनाव में उतरी पत्नी हारी।
-लगातार मिल रही हार से विधानसभा स्तर पर संगठन में बिखराव।
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