जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी को अदालत में पेश होना ही होगा
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अदालत ने जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी के खिलाफ एक आपराधिक मामले को खारिज करने से इनकार कर दिया।
अदालत ने कहा वह ऐतिहासिक मस्जिद के प्रमुख होने का लाभ नहीं उठा सकते और सांप्रदायिक तनाव के मनगढ़ंत एवं काल्पनिक खतरे की आड़ में अदालतों की शक्ति से भाग नहीं सकते।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश लोकेश कुमार शर्मा ने सांप्रदायिक तनाव की बात को मजाकिया करार देेते हुए इमाम की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि उनको जेड प्लस सुरक्षा हासिल है और अगर उनको सुनवाई का सामना करना पड़ा तो असुविधा होगी।
अदालत ने दी सोनिया और राहुल गांधी की मिसाल
अदालत ने उनकी इस दलील को खारिज करते हुए नेशनल हेराल्ड मामले की मिसाल दी जहां कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी बतौर आरोपी अदालत में पेश हुए थे। उन्हें बहुत अधिक सुरक्षा का खतरा है, लेकिन बिना किसी असुविधा के अदालत में पेश हुए।
अदालत ने कहा कि अगर ऐसी छूट और अपवाद को कानूनी क्षेत्र में लाया जाता है तो किसी भी पंथ के धार्मिक प्रमुख को न्याय के कठघरे में नहीं लाया जा सकेगा।
शाही इमाम ने मजिस्ट्रेटी अदालत के मई 2016 के आदेश के खिलाफ दायर समीक्षा याचिका पर यह टिप्पणी की। उनके खिलाफ यह मामला 2001 में सरकारी नौकरशाहों के साथ कथित मारपीट करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़ा है।