68 साल के भाई की मौत के बाद 9 दिन तक लाश के साथ ही सोता रहा 70 साल का भाई
68 साल के छोटे भाई की 23 जून को मौत हो जाने की संभावना, शव बुरी तरह सड़ी गली हालत में मिला
साइड स्टोरी भी आएगी....
करावल नगर में दिल दहला देने वाली घटना...
छोटे भाई के शव के साथ नौ दिन सोया 70 साल का बुजुर्ग
-68 साल के छोटे भाई की 23 जून को मौत हो जाने की संभावना, शव बुरी तरह सड़ी गली हालत में मिला
-बड़ा भाई मानसिक रूप से बीमार, नौ दिन से घर का दरवाजा भी नहीं खोला, इसी वजह से पड़ोसियों को नहीं लगी भनक
-छोटा भाई करावल नगर के एक पब्लिक स्कूल में पढ़ाता था संस्कृत, उसी से होता था दोनों भाईयों का गुजारा
-परिवार में एक बहन झांसी में रहती है, बड़ा भाई बीकानेर में रहता है, पुलिस का उनसे नहीं हो सका संपर्क
-पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद पड़ोसियों व मानसिक बीमार भाई की मौजूदगी में कराया अंतिम संस्कार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली, 05 जुलाई
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विस्तार
राजधानी की भागती दौड़ती लाइफ में लोग एकांकीपन का शिकार हो रहे हैं। ऐसे ही मामले में करावल नगर इलाके में दिल झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां मानसिक रूप से बीमार 70 साल के एक भाई ने 68 साल के भाई की मौत के बाद उसके शव के साथ नौ दिन बिताए।
बड़ा भाई प्रह्लाद भटनागर (70) अपने छोटे भाई राजेंद्र भटनागर (68) की मौत को स्वीकार करने को तैयार ही नहीं हुआ। वह उसके साथ सोता रहा, शव बुरी तरह सड़ गया, यहां तक उसमें कीड़े भी पड़ गए। राजेंद्र के स्कूल से उसके साथी उसकी खेर-खबर लेने आए तो उसकी मौत का पता चला।
मामले की सूचना मिलते ही शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। फिलहाल राजेंद्र के बाकी परिवार से संपर्क नहीं हो सका है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर पड़ोसियों व प्रह्लाद की मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार करा दिया। अब करावल नगर थाना पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
दोनों भाई ने नहीं की थी शादी
स्कूल से मिलने वाली सैलरी से दोनों भाई अपना गुजारा कर रहे थे। दोनों ही खाना बनाकर खुद खाते थे इनके परिवार में एक बड़ा भाई बीकानेर व बहन झांसी में रहती थी। फिलहाल दोनों का राजेंद्र व प्रह्लाद से संपर्क नहीं था। इधर प्रह्लाद व राजेंद्र अविवाहित थे।
पड़ोसियों का कहना है कि अकेले रहने के कारण दोनों एकांकीपन का शिकार हो गए थे। गत 23 जून को राजेंद्र की तबीयत बिगड़ी तो वह दवाई खाकर सो गया।इसके बाद वह नहीं उठा। प्रह्लाद ने उसी दिन शाम को, फिर अगले दिन उठाया, लेकिन राजेंद्र नहीं उठा। प्रह्लाद ने सोचा शायद राजेंद्र की तबीयत ज्यादा खराब है।
मरे हुए भाई के साथ सोता रहा
प्रह्लाद खुद खाना बनाकर मरे हुए भाई के साथ सोता रहा। भाई का शव सडने लगा, लेकिन उसने किसी को सूचना नहीं दी। इधर गर्मियों की छुट्टियों के बाद 27 जून को राजेंद्र का स्कूल खुल गया।
स्कूल न जाने पर 28 जून को स्कूल का चपरासी कुछ चाबियां जो राजेंद्र के पास थी उनके घर लेने पहुंचा और उसने प्रह्लाद से राजेंद्र के बारे में पूछा। प्रह्लाद ने उससे राजेंद्र के बीकानेर जाने की बात की।
इधर दुबारा एक जुलाई को चपरासी दुबारा गया, उसे यह ही जवाब मिला। इधर स्कूल के प्रिंसिपल लक्ष्मीचंद तोमर ने सोमवार को स्कूल के दो शिक्षक नंद कुमार व उत्तम कुमार को घर भेजा।
शिक्षकों ने बाहर निकलकर मचा दिया शोर
दरवाजा खटखटाने पर जैसे ही प्रह्लाद ने दरवाजा खोला, दोनों टीचर को कुछ दुर्गंध आई। जैसे ही दोनों अंदर घुसे उनको सामने बैड पर बुरी तरह सड़ा-गला शव पड़ा मिला।
दोनों शिक्षकों ने बाहर निकलकर शोर मचा दिया। घर के बाहर लोगों की भारी भीड़ इकट्ठा हो गई। मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
भाई की मौत को स्वीकार नहीं कर रहा भाई
प्रह्लाद से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि उसकी भाई की तबीयत ज्यादा खराब है। उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक प्रह्लाद भाई की मौत को स्वीकार करने के लिए भी तैयार नहीं हुआ।
राजेंद्र के परिवार बाकी किसी सदस्य से पुलिस संपर्क नहीं कर सकी। घर से कोई उनका सुराग नहीं मिला। मंगलवार को पुलिस ने राजेंद्र के शव का पोस्टमार्टम कर दिया। फिलहाल उसके परिवार का पता लगाने का प्रयास कर रही है।