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क्या आप जानते हैं, रोजा रखने के पीछे है एक बड़ी खास वजह
ब्यूरो/अमर उजाला, तावड़ू
Updated Wed, 15 Jun 2016 09:39 AM IST
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जुमे की नमाज अदा की
- फोटो : अमर उजाला
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दौड़-भाग और खुदगर्जी भरी जिंदगी के बीच इंसान को अपने अंदर झांकने और खुद को अल्लाह की राह पर ले जाने की प्रेरणा देने वाले रमजान माह में भूख-प्यास समेत तमाम शारीरिक इच्छाओं तथा झूठ बोलने, चुगली करने, खुदगर्जी, बुरी नजर डालने जैसी सभी बुराइयों पर लगाम लगाने की मुश्किल कवायद रोजेदार को अल्लाह के बेहद करीब पहुंचा देती है।
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इस माह में रोजेदार अल्लाह के नजदीक आने की कोशिश के लिए भूख-प्यास समेत तमाम इच्छाओं को रोकता है। बदले में अल्लाह इबादत गुजार रोजेदार बंदे के बेहद करीब आकर उसे अपनी रहमतों और बरकतों से नवाजता है। यह बाते मौलाना जिया-उल हक ने अपने एक ब्यान में बताई।
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मौलाना ने कहा कि इस्लाम की पांच बुनियादों में रोजा भी शामिल है और इस पर अमल के लिए ही अल्लाह ने रमजान का महीना मुकर्रर किया है। इंसान के अंदर जिस्म और रूह है। आम दिनों में उसका पूरा ध्यान खाने-पीने और दीगर जिस्मानी जरूरतों पर रहता है लेकिन असल चीज उसकी रूह है।
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इसी की तरबियत और पाकीजगी के लिए अल्लाह ने रमजान बनाया है। उन्होंने ने बताया कि रमजान में की गई हर नेकी का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। इस महीने में एक रकात नमाज अदा करने का सवाब 70 गुना हो जाता है। साथ ही इस माह में दोजख (नरक) के दरवाजे भी बंद कर दिए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि इसी महीने में कुरान शरीफ दुनिया में नाजिल (अवतरित) हुआ था। रमजान की विशेषताओं का जिक्र करते हुए जिया-उल हक ने बताया कि रोजा सभी नबीयों की उमतों पर फर्ज था। अल्लाह पाक ने कुरआन मजीद में फरमाया है कि ईमान वालों जिस तरह अन्य नबियों की उमतों पर रोजा फर्ज किया गया है उसी तरह तरह आखिरी पैगंबर हजरत मुहमद सललहु अलैहि वस्सलम की उमत यानि तुम पर भी रोजा फर्ज किया गया है।
ताकि इंसान परहेजगार बनकर अल्लाह की इबादत करे और उसके बंदों की खिदमत करें। मौलाना ने बताया की रोजा बुराई से रोकता है। जिस तरह ढाल से आदमी दुश्मन के वार से अपने आपको बचा लेता है, उसी तरह रोजा रोजेदारों के लिए कयामत के दिन ढाल साबित होगा।
यानि रोजा उसे जहन्नुम में जाने से बचा लेगा। उन्होंने कहा की अल्लाह के प्यारे रसूल सल्ललाहो तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया है जो आदमी इस महीने में मौमिन भाई को सदका करेगा। उसे सारी दुनिया की दौलत सदका करने के बराबर सवाब मिलेगा। इसलिए हमें चाहिए की इस माहे मुबारक में गरीब, यतीम व मिस्किन को ज्यादा से ज्यादा जकात, फितरा सदका आदि दें और माहे मुबारक में अपने हिस्से की नेकिया हासिल करें।