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Delhi NCR News: आंदोलन में विचारों की तलाश, संविधान और भगत सिंह पर किताबों की बढ़ी मांग
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प्रदर्शन में शामिल युवा वैचारिक साहित्य की ओर बढ़े, कई लोकप्रिय पुस्तकें आउट ऑफ स्टॉक
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन का असर आसपास के बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है। सुरक्षा बंदोबस्त और प्रतिबंधों के कारण बाजारों में सन्नाटा पसरा है। दुकानें, शोरूम, बैंक, कार्यालय और रेस्टोरेंट बंद रहने से कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हालांकि, इस माहौल के बीच एक सकारात्मक तस्वीर भी सामने आई है। प्रदर्शन में शामिल युवाओं के बीच संविधान, सामाजिक न्याय और भगत सिंह के विचारों से जुड़ी पुस्तकों की मांग तेजी से बढ़ी है।
संसद मार्ग पर पिछले 40 वर्षों से किताबें बेच रहे नेक राम बताते हैं कि सामान्य दिनों की तुलना में बिक्री काफी घट गई है। ग्राहकों की आवाजाही लगभग थम चुकी है, लेकिन प्रदर्शन में शामिल युवा अपनी पसंद की किताबें और अखबार खरीदना नहीं भूल रहे।
पुस्तक विक्रेता उजाला के अनुसार, इन दिनों सबसे अधिक मांग भारतीय संविधान, जात-पात का विनाश और शहीद-ए-आजम भगत सिंह पर आधारित पुस्तकों की है। भगत सिंह पर हिंदी की लोकप्रिय पुस्तक पूरी तरह बिक चुकी है, जबकि संविधान और अन्य वैचारिक पुस्तकों का स्टॉक भी तेजी से खत्म हो रहा है। उनका कहना है कि लंबे समय बाद किसी आंदोलन में लोगों के बीच पढ़ने और अपने विचारों को समझने की ऐसी उत्सुकता देखने को मिली है। प्रदर्शनकारी केवल नारे नहीं लगा रहे, बल्कि अपने वैचारिक आधार को मजबूत करने के लिए किताबें भी खरीद रहे हैं।
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इंटरनेट बंदी से कारोबार पर दोहरी चोट
नई दिल्ली के बड़े हिस्से में इंटरनेट सेवाएं बंद रहने से पुस्तक विक्रेताओं की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। ऑनलाइन भुगतान नहीं हो पाने के कारण कई ग्राहक नकदी न होने से बिना खरीदारी किए लौट गए। इससे पहले से प्रभावित बिक्री पर अतिरिक्त असर पड़ा। उजाला बताते हैं कि पहले उनकी दुकान सुबह से रात आठ बजे तक खुलती थी, लेकिन मौजूदा हालात में अब केवल सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक ही कारोबार कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि स्थिति सामान्य होने के बाद ही कारोबार के फिर से पटरी पर लौटने की उम्मीद है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन का असर आसपास के बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है। सुरक्षा बंदोबस्त और प्रतिबंधों के कारण बाजारों में सन्नाटा पसरा है। दुकानें, शोरूम, बैंक, कार्यालय और रेस्टोरेंट बंद रहने से कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हालांकि, इस माहौल के बीच एक सकारात्मक तस्वीर भी सामने आई है। प्रदर्शन में शामिल युवाओं के बीच संविधान, सामाजिक न्याय और भगत सिंह के विचारों से जुड़ी पुस्तकों की मांग तेजी से बढ़ी है।
संसद मार्ग पर पिछले 40 वर्षों से किताबें बेच रहे नेक राम बताते हैं कि सामान्य दिनों की तुलना में बिक्री काफी घट गई है। ग्राहकों की आवाजाही लगभग थम चुकी है, लेकिन प्रदर्शन में शामिल युवा अपनी पसंद की किताबें और अखबार खरीदना नहीं भूल रहे।
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पुस्तक विक्रेता उजाला के अनुसार, इन दिनों सबसे अधिक मांग भारतीय संविधान, जात-पात का विनाश और शहीद-ए-आजम भगत सिंह पर आधारित पुस्तकों की है। भगत सिंह पर हिंदी की लोकप्रिय पुस्तक पूरी तरह बिक चुकी है, जबकि संविधान और अन्य वैचारिक पुस्तकों का स्टॉक भी तेजी से खत्म हो रहा है। उनका कहना है कि लंबे समय बाद किसी आंदोलन में लोगों के बीच पढ़ने और अपने विचारों को समझने की ऐसी उत्सुकता देखने को मिली है। प्रदर्शनकारी केवल नारे नहीं लगा रहे, बल्कि अपने वैचारिक आधार को मजबूत करने के लिए किताबें भी खरीद रहे हैं।
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इंटरनेट बंदी से कारोबार पर दोहरी चोट
नई दिल्ली के बड़े हिस्से में इंटरनेट सेवाएं बंद रहने से पुस्तक विक्रेताओं की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। ऑनलाइन भुगतान नहीं हो पाने के कारण कई ग्राहक नकदी न होने से बिना खरीदारी किए लौट गए। इससे पहले से प्रभावित बिक्री पर अतिरिक्त असर पड़ा। उजाला बताते हैं कि पहले उनकी दुकान सुबह से रात आठ बजे तक खुलती थी, लेकिन मौजूदा हालात में अब केवल सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक ही कारोबार कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि स्थिति सामान्य होने के बाद ही कारोबार के फिर से पटरी पर लौटने की उम्मीद है।