नोएडा में 8 मंजिला अवैध इमारत सील, प्राधिकरण की जमीन पर हुआ था निर्माण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में इमारतों के जमींदोज होने की घटना के बाद नोएडा प्राधिकरण ने शहर में अवैध निर्माण के खिलाफ सख्ती दिखाना शुरू कर दिया है। मंगलवार को प्राधिकरण ने सेक्टर-142 के पास गढ़ी शाहदरा गांव में खसरा नंबर-472 में 4000 वर्गमीटर जमीन पर अवैध रूप से बन रही आठ मंजिला इमारत को सील कर दिया। बताया जा रहा है कि इमारत का काम मई 2017 से बंद था।
प्राधिकरण की ओर से भूमाफिया की लिस्ट बनाकर जिला प्रशासन को पहले ही भेजी गई थी। इसके टॉप टेन में इस इमारत को बनवाने वाले का नाम शामिल था। बावजूद अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में हुई घटना के बाद नोएडा प्राधिकरण के पास कार्रवाई के अलावा कोई चारा नहीं था।
इसके बाद प्राधिकरण और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और करीब 32 करोड़ रुपये की इस जमीन पर बनी आठ मंजिला इमारत को सील कर दिया। सील करने के बाद उस इमारत पर नोएडा प्राधिकरण की संपत्ति लिखी गई। बताया जा रहा है कि उस इमारत में 112 फ्लैटों का निर्माण कार्य चल रहा था।
दो बार हो चुकी है एफआईआर
नोएडा प्राधिकरण का कहना है कि अवैध निर्माण को लेकर सूरजपुर थाने में 2012 एवं 2017 में एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी हैं। लिहाजा, इससे यही अंदाजा लगता है कि इस तरह के निर्माण की पहले से ही प्राधिकरण को जानकारी थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हो पा रही थी।
खास बात यह कि प्राधिकरण का कहना है कि इस अधिगृहीत जमीन का मुआवजा भी दिया जा चुका है। इस संबंध में 2017 में भूमाफियाओं की जो लिस्ट बनाकर जिलाधिकारी को सौंपी गई थी। उसमें आठवें नंबर पर रवींद्र कुमार का नाम शामिल है। बताया जा रहा है कि यह इमारत भी उसी की ओर से बनाई जा रही थी।
सीलिंग के बाद किसी ने नहीं किया संपर्क
नोएडा प्राधिकरण की सीलिंग की कार्रवाई के बाद किसी ने अभी संपर्क नहीं किया है। यही नहीं किसी निवेशक ने भी अभी तक संपर्क नहीं किया है। लिहाजा, यह कहना मुश्किल है कि किसी ने फ्लैट की बुकिंग कराई थी या नहीं।
70 से 80 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर की है जमीन
जिस जगह पर नोएडा प्राधिकरण ने सीलिंग की कार्रवाई की है। वहां की जमीन 70 से 80 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर की बताई जा रही है। हालांकि, यह पूरी तरह से अवैध निर्माण है। रेट को लेकर कुछ अंतर भी हो सकता है।