Delhi: सख्ती के बावजूद नियमों को तोड़ रहीं स्कूल बसें, स्कूल प्रबंधन और अभिभावक नहीं हैं गंभीर
घर से स्कूल तक पहुंचने के दौरान बसों और वैन में बच्चे किस तरह बैठे हैं, वाहन किस स्थिति में है और चालक किस तरह से वाहन को चला रहा है इसकी चिंता न तो स्कूल के प्रबंधन को है और न ही अभिभावकों को है।
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हरियाणा में स्कूल बस हादसे ने अभिभावकों चिंता की बढ़ा दी है। राजधानी में स्कूल बस और वैन भी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए फर्राटा भरती हैं। इसमें सबसे ज्यादा खतरनाक ड्राइविंग और गलत पार्किंग के मामले सामने आते हैं वहीं परमिट नियमों के उल्लंघन के भी अधिक मामले आ रहे हैं। दिल्ली यातायात पुलिस के आंकड़ों पर नजर डाले तो वर्ष 2023 में विभिन्न प्रकार के नियमों के उल्लंघन पर स्कूल बसों के 824 चालान किए गए हैं। वहीं वर्ष 2022 में यह आंकड़ा 504 था।
स्कूल प्रबंधन और अभिभावक नहीं हैं गंभीर
घर से स्कूल तक पहुंचने के दौरान बसों और वैन में बच्चे किस तरह बैठे हैं, वाहन किस स्थिति में है और चालक किस तरह से वाहन को चला रहा है इसकी चिंता न तो स्कूल के प्रबंधन को है और न ही अभिभावकों को है। अभिभावक और स्कूल प्रबंधन कई मामलों में यह तक जानने का प्रयास नहीं करते हैं कि स्कूल बसों के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने क्या निर्देश दिया हैं। उन निर्देश का पालन किया जा रहा है या नहीं।
यह हैं सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि स्कूल बसें पीले रंग की होनी चाहिए और आगे व पीछे स्कूल बस लिखा हाेना चाहिए। किराये की बस होने पर उस पर स्कूल डयूटी पर लिखा होना चाहिए। बस में फर्स्ट-एड-बॉक्स अवश्य होना चाहिए। खिड़कियों पर ग्रिल लगी होनी चाहिए। बस में आग बुझाने के लिए अग्निशमन यंत्र,बस पर स्कूल का नाम और टेलीफोन नंबर लिखा हाेना चाहिए। बस के चारों ओर बीच में 150 मिमी चौडाई की हरे रंग की पट्टी होनी चाहिए। बस में स्कूल की तरफ से एक अटेंडेंट होना चाहिए। बस की अधिकतम रफ्तार सीमा 40 किलोमीटर प्रतिघंटा होनी चाहिए। स्कूल बस चालक के पास कम से कम चार साल का वाहन चलाने का अनुभव और वैध लाइसेंस होना चाहिए।
स्कूल बस चालक के पास बस में जाने वाले सभी बच्चों की पूरी सूची, नाम, कक्षा, आवासीय पता, ब्लड ग्रुप और ड्राप प्वाइंट की पूरी जानकारी होनी चाहिए। सभी स्कूल बसों में दो आपातकालीन निकास द्वार होने चाहिए। एक बस के पिछले आधे हिस्से में दांयी तरफ और दूसरा बस के पिछले हिस्से में। 333 मामले तीन माह में : इस वर्ष जनवरी से मार्च तक स्कूल बस और वैन के नियमों के उल्लंघन पर 333 चालान यातायात पुलिस ने किए हैं। इनमें खतरनाक ड्राइविंग के 16, परमिट उल्लंघन के 44, वाहन चलाते समय फोन का इस्तेमाल के 6, सीट बेल्ट उल्लंघन के 49 चालान किए गए हैं।
यह हैं मामले
मामले बस वैन
गलत पार्किंग 135 51
खतरनाक ड्राइविंग 59 14
परमिट उल्लंघन 139 47
सीट बेल्ट उल्लंघन 255 62
स्टाॅप लाइन का उल्लंघन 41 45
नोट : आंकड़े वर्ष एक जनवरी से दिसंबर 2023 तक है।
पूर्व में हुए हादसे
18 जनवरी 2024 को दक्षिणी पूर्वी दिल्ली में 12 वर्षीय छात्रा को एक स्कूल बस ने टक्कर मार दी। इससे उसकी मौत हो गई।
17 अक्टूबर, 2023 को दिल्ली कैंट इलाके में एक प्राइवेट स्कूल की तेज रफ्तार बस ने बच्चों से भरी सेंट्रल स्कूल के वैन में जोरदार टक्कर मार दी। दुर्घटना में कई बच्चे घायल हो गए।
12 जुलाई, 2022 को पूर्वी दिल्ली के जीटीबी एन्क्लेव थाना इलाके में एक प्राइवेट स्कूल वैन अनियंत्रित होकर पलट गई। इस घटना में चार बच्चे घायल हुए थे।