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घोटाला : 13 साल में बीए पास कर कौन कर सकता है नौकरी
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Sun, 19 Mar 2017 10:11 PM IST
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जब राज्य सरकार ने सरकारी सेवाओं में नियुक्ति की आयु 18 वर्ष कर रखी है तो कोई व्यक्ति 13 साल की उम्र में बीए पास कर नौकरी कैसे कर सकता है। ये तो एक प्रकार का अजूबा है। लेकिन नगर निगम में सफाईकर्मियों की भर्ती में कुछ इसी तरह का गड़बड़ झाला सामने आया है।
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नगर निगम में नाबालिग उम्र में नौकरी करने का मामला कोई एक दो नहीं बल्कि 21 मामले सामने आए हैं। इसका खुलासा अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ के प्रांतीय महामंत्री सुनील कंडेरा ने की है। उन्होंने निगम प्रशासन से इसका जवाब देने और सरकार से इस पूरे मामले की जांच एसआईटी से कराने की मांग की है।
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सुनील कंडेरा ने बताया कि वर्ष 1994 में नगर निगम में 194 सफाईकर्मियों की नियुक्ति दैनिक वेतनभोगी के रूप में की गई थी। उसमें से 21 कर्मचारी ऐसे पाए गए जो नियुक्ति के दौरान नाबालिग थे। कंडेरा ने बताया कि उन्होंने जब इसकी जांच पड़ताल की तो ये मामला सामने आया।
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एसआईटी से जांच की मांग
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नगर निगम के प्रस्थापना विभाग की लिस्ट में जो जन्म तिथि कर्मचारी की लिखी गई है उसमें नाबालिग होने की पुष्टि हो रही है। कंडेरा का आरोप है कि दैनिक सफाईकर्मियों की भर्ती में रवि प्रकाश नामक एक कर्मचारी की जन्मतिथि 18 फरवरी 1981 दर्शायी गई है।
यही नहीं उसकी शैक्षिक योग्यता बीए पास है। हैरानी की बात ये है कि सभी 21 नाबालिग कर्मचारियों को एक अक्तूबर 2003 को नियमित भी कर दिया गया। अब वह निगम में स्थायी तौर पर नौकरी कर रहे हैं।
कंडेरा का आरोप है कि नगरनिगम के निचले स्तर के अधिकारी सफाई कर्मचारी नेताओं के साथ सांठ गांठ करके इस तरीके से चहेतों को नौकरी पर रखने का खेल करते हैं। नियुक्ति के मामले में निगमायुक्त को भी विश्वास में नहीं लिया जाता।
प्रस्थापना अधिकारी के स्तर पर ही ये पूरा खेल चलता है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की एसआईटी से जांच कराई जानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। कंडेरा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मामले की जांच नहीं कराई गई तो आंदोलन करेंगे। उधर संयुक्त आयुक्त मुकेश सोलंकी का कहना है कि उनके सामने ऐसा कोई मामला नहीं आया है। यदि कोई मामला आता है तो उसकी जांच कराई जाएगी।
यही नहीं उसकी शैक्षिक योग्यता बीए पास है। हैरानी की बात ये है कि सभी 21 नाबालिग कर्मचारियों को एक अक्तूबर 2003 को नियमित भी कर दिया गया। अब वह निगम में स्थायी तौर पर नौकरी कर रहे हैं।
कंडेरा का आरोप है कि नगरनिगम के निचले स्तर के अधिकारी सफाई कर्मचारी नेताओं के साथ सांठ गांठ करके इस तरीके से चहेतों को नौकरी पर रखने का खेल करते हैं। नियुक्ति के मामले में निगमायुक्त को भी विश्वास में नहीं लिया जाता।
प्रस्थापना अधिकारी के स्तर पर ही ये पूरा खेल चलता है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की एसआईटी से जांच कराई जानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। कंडेरा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मामले की जांच नहीं कराई गई तो आंदोलन करेंगे। उधर संयुक्त आयुक्त मुकेश सोलंकी का कहना है कि उनके सामने ऐसा कोई मामला नहीं आया है। यदि कोई मामला आता है तो उसकी जांच कराई जाएगी।