फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   SC-ST Act: attack on AIIMS bus during returning from drug addiction center Ghaziabad

दलित हिंसा : नशा मुक्ति केंद्र से वापस लौट रही AIIMS के बस पर हमला, बाल-बाल बचे 25 डॉक्टर

Tue, 03 Apr 2018 05:36 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 03 Apr 2018 05:36 AM IST
विज्ञापन
SC-ST Act: attack on AIIMS bus during returning from drug addiction center Ghaziabad
- फोटो : अमर उजाला

विभिन्न इलाकों में सोमवार को हुई हिंसा में देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स के डॉक्टर बाल-बाल बचे। गाजियाबाद स्थित नशा मुक्ति केंद्र से वापस लौट रहे डॉक्टरों से भरी बस पर आंदोलनकारियों ने पथराव किया, जिसकी वजह से बस की कई खिड़कियां और उन पर लगा शीशा टूटने से डॉक्टरों में भगदड़ मच गई।

विज्ञापन


आनन-फानन में बस से नीचे उतरकर डॉक्टरों ने इस बात की सूचना एम्स प्रबंधन को दी। जिसके बाद स्थानीय पुलिस को तत्काल डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए सूचना दी गई।
विज्ञापन


डॉक्टरों ने बताया कि भीड़ इस कदर बेकाबू थी कि उनको बार-बार बोलने पर भी सुनने को तैयार नहीं थे, जबकि बस पर एम्स और डॉक्टर ड्यूटी दोनों लिखा हुआ था। हालांकि राहत की खबर यह रही कि समय रहते सभी डॉक्टरों ने खुद की सुरक्षा करते हुए हिंसा से खुद को बचाया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

हिंसा करने वालों में ज्यादातर 17 से 22 वर्ष तक की आयु के लड़के

SC-ST Act: attack on AIIMS bus during returning from drug addiction center Ghaziabad

बता दें कि गाजियाबाद स्थित नशा मुक्ति केंद्र में रुटीन जांच को लेकर एम्स की ओर से डॉक्टरों का दल सप्ताह में एक दो बार जाता रहता है। चूंकि पिछले चार दिन से सरकारी अवकाश होने के कारण सोमवार को डॉक्टरों का जाना तय था। सोमवार सुबह बस में करीब 25 डॉक्टर मौजूद थे। नशा मुक्ति केंद्र पर तमाम रोगियों की जांच के बाद बस गाजियाबाद से दिल्ली की ओर रवाना हुई। 

इस बीच यूपी बॉर्डर पर चंद आंदोलनकारियों ने बस को चारों ओर से घेर लिया और पथराव शुरू कर दिया। बस में मौजूद डॉक्टरों ने बताया कि रेलवे ट्रैक पर बिछने वाले पत्थरों से आंदोलनकारी हमला कर रहे थे। उनकी बस के ज्यादातर कांच टूट गए थे। सभी डॉक्टरों ने अपनी जान बचाने के लिए सीट के नीचे घुसना ही ठीक समझा। एक डॉक्टर ने बताया कि आंदोलनकारियों की संख्या कम होने की वजह से बड़ा हादसा टल गया। हिंसा करने वालों में ज्यादातर 17 से 22 वर्ष तक की आयु के लड़के थे। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed