दिल्ली गैंगरेपः आरोपियों की फांसी पर रोक बढ़ी
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सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर, 2012 के सामूहिक बलात्कार और हत्या के जुर्म में मौत की सजा पाने वाले दो मुजरिमों को फांसी पर रोक की अवधि सोमवार को सात अप्रैल तक के लिये बढ़ा दी।
सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में निचली अदालत के फैसले की प्रति मांगी है।
जस्टिस बीएस चौहान और जस्टिस जेचेलामेश्वर की दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के 13 मार्च के निर्णय पर गौर किया।
कोर्ट फैसले पर फिर से करेगी विचार!
लेकिन वे निचली अदालत का फैसला भी देखना चाहते हैं जिसने दोषियों को मौत की सजा सुनायी थी। हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला सही ठहराया था।
पीठ ने इसके साथ ही इस प्रकरण के चार में से दो मुजरिमों मुकेश और पवन गुप्ता को फांसी देने पर सात अप्रैल तक के लिये रोक लगा दी।
शीर्षस्थ अदालत ने 15 मार्च को इन दोनों मुजरिमों के वकील मनोहर लाल शर्मा की ओर से अपील दायर किये जाने पर आज तक के लिये इन्हें फांसी देने पर रोक लगायी थी।
बाकी आरोपियों की सजा बरकरार
सामूहिक बलात्कार और हत्या के इस सनसनीखेज मामले में मुकेश और पवन के अलावा हाईकोर्ट ने अक्षय ठाकुर तथा विनय शर्मा की भी मौत की सजा बरकरार रखी थी।
हाईकोर्ट ने इन मुजरिमों की अपील खारिज करते हुये उनके अपराध को बेहद क्रूर बताया था। साथ ही कहा था कि इस अपराध के लिये दोषियों को ऐसी सजा दी जानी चाहिए जो दूसरों के लिये नजीर बने।
गौरतलब है कि दक्षिणी दिल्ली में 16 दिसंबर, 2012 की रात छह व्यक्तियों ने चलती बस में इस युवती की निर्दयता से पिटाई के बाद उससे सामूहिक बलात्कार किया था। फिर उसे तथा उसके मित्र को चलती बस से बाहर फेंक दिया था। इस युवती की बाद में 29 दिसंबर को सिंगापुर के अस्पताल में मृत्यु हो गयी थी।